विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज निर्माण में एमइएस, बीआरओ, IIT और मुंबई की कंपनी करेंगे काम, रूपरेखा तय
विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज निर्माण की योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। एमईएस, बीआरओ, आईआईटी विशेषज्ञ और मुंबई की एक कंपनी मिलकर यातायात बहाल करने ...और पढ़ें

“एमइएस, बीआरओ और विशेषज्ञ टीम तैयार कर रही विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज”
HighLights
एमईएस और बीआरओ ने पुल का विस्तृत सर्वे किया।
49 मीटर बेली ब्रिज से यातायात बहाल होगा।
लोड क्षमता जांच के बाद ही वाहन चलेंगे।
भागलपुर, जागरण संवाददाता। विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज के निर्माण को लेकर रविवार को मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज (एमइएस) की टीम ने निरीक्षण किया। टीम ने पुल के ऊपरी और निचले हिस्से का विस्तार से सर्वे किया और फीता से मजबूत हिस्सों की मापी भी ली। जांच में पाया गया कि क्षतिग्रस्त हिस्से के दोनों ओर 7.8-7.8 मीटर क्षेत्र सुरक्षित है, जहां बेली ब्रिज बनाकर यातायात बहाल किया जा सकता है।
एमइएस की टीम ने ड्रोन से भी क्षतिग्रस्त हिस्सों का सर्वे किया। इसके बाद अधिकारी बरारी गंगा घाट पहुंचे और एसडीआरएफ की बोट से पिलरों के पास जाकर उसके नीचे से ऊपर तक स्लैब सतह का निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के आधार पर 49 मीटर लंबा बेली ब्रिज तैयार कर पुल पर आवागमन फिर से शुरू कराने की योजना बनाई गई है।
बीआरओ ने किया विस्तृत सर्वे
बार्डर रोड्स आर्गेनाइजेशन (बीआरओ) के कमांडेंट और उनकी टीम भी विक्रमशिला सेतु पहुंचे। बेली ब्रिज बनाने से पहले टीम ने पुल पर मार्किंग की और पुल निर्माण निगम के अभियंताओं के साथ बोट से पिलरों की स्थिति का निरीक्षण किया। टीम ने हर एंगल से पुल के क्षतिग्रस्त और मजबूत हिस्से की जांच की ताकि निर्माण में किसी भी तरह की कमी न रहे।
बीआरओ की टीम ने कमांडेंट के नेतृत्व में रविवार को सेतु पर बेली ब्रिज बनाने के लिए सर्वे किया। ड्रोन से भी पुल की स्थिति का निरीक्षण किया गया। टीम की रिपोर्ट जल्द ही केंद्रीय अधिकारियों को भेजी जाएगी। संयुक्त रिपोर्ट के आधार पर ही बेली ब्रिज निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा।
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बेली ब्रिज की लोड क्षमता की जांच
आईआइटी के विशेषज्ञ और मुंबई की एक कंपनी के सदस्य भी निरीक्षण में शामिल रहे। उन्होंने बताया कि बेली ब्रिज बनने के बाद बड़े वाहन चलाकर उसकी लोड क्षमता की जांच की जाएगी। इस परीक्षण के सफल होने के बाद ही छोटी गाड़ियों को पुल पर चलाने की इजाजत दी जाएगी।
सुरक्षा के लिहाज से यह कदम बेहद अहम है, क्योंकि पिछले सप्ताह पुल का क्षतिग्रस्त हिस्सा आवागमन के लिए खतरा बन गया था। बड़े वाहनों की लोड क्षमता पर ध्यान देने से यातायात सुरक्षित रहेगा और सड़क मार्ग पर आने-जाने वाले लोग आसानी से गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।
पुल के लिए तकनीकी तैयारी
एमइएस की टीम ने पुल के ऊपरी हिस्से और क्षतिग्रस्त हिस्से दोनों का निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने यह सुनिश्चित किया कि पुल का कोई हिस्सा कमजोर न रह जाए और निर्माण में सभी सुरक्षा मानकों का पालन हो। पुल के पिलरों और स्लैब की सतह का बारीकी से निरीक्षण किया गया ताकि बेली ब्रिज की मजबूती सुनिश्चित की जा सके।
संजय भारती, एनएच के मुख्य अभियंता ने कहा, "बीआरओ की टीम ने कमांडेंट के नेतृत्व में रविवार को सेतु पर बेली ब्रिज बनाने के लिए सर्वे किया। ड्रोन से भी सर्वे किया गया। रिपोर्ट जल्द भेजे जाने की उम्मीद है। संयुक्त रिपोर्ट के आधार पर ही बेली ब्रिज निर्माण का कार्य शुरू होगा।"
लोगों को मिलेगी राहत
बेली ब्रिज बनने के बाद विक्रमशिला सेतु पर यातायात बहाल हो जाएगा। इससे भागलपुर और आसपास के इलाकों में आवागमन सुचारू हो जाएगा। व्यापार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सेवाओं पर पड़ने वाला असर कम होगा। पुल पर बेली ब्रिज का निर्माण छोटे और बड़े वाहनों दोनों के लिए राहत की खबर है।
विशेषज्ञों ने बताया कि बेली ब्रिज अस्थायी रूप से स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य क्षतिग्रस्त हिस्से के पास सुरक्षित मार्ग बनाना है। पुल की स्थिति का लगातार निरीक्षण किया जाएगा और आवश्यकतानुसार सुधार किया जाएगा।
संयुक्त प्रयास से काम पूरा होगा
बेली ब्रिज निर्माण के लिए एमइएस, बीआरओ, आइआइटी विशेषज्ञ और मुंबई की कंपनी के विशेषज्ञ एक साथ काम कर रहे हैं। टीम ने पुल के हर हिस्से का निरीक्षण किया और निर्माण की योजना तैयार की। बेली ब्रिज बनने के बाद यातायात की जांच भी की जाएगी ताकि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सभी पक्षों ने इसे युद्धस्तर पर कार्य बताते हुए कहा कि जल्द ही पुल पर आवागमन शुरू हो जाएगा। इसके लिए बेली ब्रिज के निर्माण में सभी आवश्यक सुरक्षा और तकनीकी मानक अपनाए जाएंगे।