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    विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर जल्द बन रहा बेली ब्रिज, राउरकेला से स्टील पहुंचा, हल्के वाहन चल सकेंगे

    Updated: Mon, 11 May 2026 12:00 PM (GMT+05:30)

    विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर बेली ब्रिज का निर्माण जल्द शुरू होगा, जिससे भागलपुर और नवगछिया के बीच हल्के वाहनों की आवाजाही बहाल होगी। ओडिश ...और पढ़ें

    “भागलपुर-नवगछिया संपर्क बहाल: राउरकेला से स्टील पहुंचा, बेली ब्रिज निर्माण शुरू होने को तैयार”

    “भागलपुर-नवगछिया संपर्क बहाल: राउरकेला से स्टील पहुंचा, बेली ब्रिज निर्माण शुरू होने को तैयार”

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। क्षतिग्रस्त विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज का निर्माण अगले एक-दो दिनों में शुरू होने जा रहा है। इसके लिए ओडिशा के राउरकेला से स्टील स्ट्रक्चर और अन्य आवश्यक सामग्री भागलपुर पहुंचने ही वाली है।

    आईआईटी रुड़की, गुवाहाटी और मध्यप्रदेश के विशेषज्ञों की निगरानी में काम होगा। 100 सदस्यीय तकनीकी दल दिन-रात पुल निर्माण में जुट जाएगा। निर्माण कार्य बार्डर रोड आर्गनाइजेशन (बीआरओ) को सौंपा गया है।

    बेली ब्रिज की तकनीकी विशेषताएं

    बेली ब्रिज निर्माण का काम विक्रमशिला सेतु के पिलर संख्या सात और आठ के बीच क्षतिग्रस्त हिस्से से लगभग 7.8 मीटर पीछे से शुरू किया जाएगा। यह पुल स्टील आधारित अस्थायी पुल होगा और प्रत्येक लेन की चौड़ाई लगभग 3.5 मीटर रहेगी।

    डीएम डा. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि देश के तीन प्रमुख केंद्रों की विशेषज्ञ टीमों की निगरानी में बेली ब्रिज का निर्माण होगा। तकनीकी दल रविवार देर रात तक भागलपुर पहुंच जाएगा और युद्धस्तर पर काम शुरू होगा। काम पूरा होने के बाद विक्रमशिला सेतु पर हल्के चारपहिया वाहनों का परिचालन सुचारू हो जाएगा।

    बेली ब्रिज से मिलेगी बड़ी राहत

    तीन मई को विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर और नवगछिया के बीच जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। सड़क संपर्क टूटने से व्यापार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और रोजमर्रा की आवाजाही पर गहरा असर पड़ा।

    बेली ब्रिज के निर्माण से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और सड़क यातायात पुनः सुचारू होगा। डीएम ने कहा कि तकनीकी दल दिन-रात काम कर पुल को जल्द से जल्द चालू कर देगा।

    तकनीकी टीम और निगरानी

    बेली ब्रिज निर्माण में शामिल 100 सदस्यीय तकनीकी दल में इंजीनियर, संरचनात्मक विशेषज्ञ और मशीन ऑपरेटर शामिल हैं।

    • आईआईटी रुड़की और गुवाहाटी की टीमें पुल निर्माण की निगरानी करेंगी।
    • मध्यप्रदेश के विशेषज्ञ भी दल का हिस्सा हैं।
    • काम की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सतत निरीक्षण और परीक्षण किए जाएंगे।

    तकनीकी दल के पहुंचते ही साइट पर मेटीरियल स्टैकिंग और तैयारी का कार्य शुरू होगा।

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    बीआरओ की जिम्मेदारी

    बेली ब्रिज का निर्माण बार्डर रोड आर्गनाइजेशन (बीआरओ) की देखरेख में होगा। बीआरओ का यह अनुभवशील दल अस्थायी पुल निर्माण के मानक और सुरक्षा नियमों का पालन करेगा।

    • पुल निर्माण के दौरान सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए स्थानीय पुलिस और प्रशासन की निगरानी रहेगी।
    • निर्माण स्थल पर सिग्नलिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे।
    • पुल पर वाहन परिचालन शुरू होने से पहले सुरक्षा परीक्षण किया जाएगा।

    प्रभावित क्षेत्रों में उम्मीद

    विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने से भागलपुर और नवगछिया के बीच लोगों की आवाजाही ठप हो गई थी।

    • व्यापारी वर्ग ने कहा कि पुल टूटने से व्यापार पर भारी असर पड़ा।
    • छात्र और अभिभावक कह रहे हैं कि स्कूल-कॉलेज आने-जाने में परेशानी हुई।
    • स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्रभावित होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    बेली ब्रिज बनने से सभी वर्गों को राहत मिलेगी और आम जनजीवन सुचारू हो जाएगा।

    निर्माण का समय और गति

    डीएम डा. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया जाएगा।

    • तकनीकी दल दिन-रात काम करेगा।
    • ओडिशा से पहुंचने वाला स्टील स्ट्रक्चर और उपकरण निर्माण की गति बढ़ाएंगे।
    • पुल निर्माण की कुल अवधि और हल्के वाहनों के परिचालन का समय जल्द ही घोषित किया जाएगा।

    प्रशासन और सुरक्षा

    बेली ब्रिज निर्माण के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को प्राथमिकता दी है।

    • पुल के आसपास सड़क बंद और चेतावनी की व्यवस्था रहेगी।
    • निर्माण स्थल पर आपातकालीन टीम और सुरक्षा गार्ड तैनात रहेंगे।
    • पुल पर निर्माण के समय किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचाव के लिए सख्त मानक लागू होंगे।

    जनजीवन प्रभावित : विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज का निर्माण शुरू होने वाला है, जो भागलपुर-नवगछिया के बीच जनजीवन को पुनः सुचारू बनाएगा। विशेषज्ञों की निगरानी में और बीआरओ की जिम्मेदारी में यह पुल जल्द ही हल्के चारपहिया वाहनों के लिए खुल जाएगा, जिससे व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा असर कम होगा।