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सिंधु जल संधि शुरू करने के लिए गिड़गिड़ा रहा पाकिस्तान, 25 करोड़ लोग पानी को तरसे

Published: Sat, 29 Aug 2026 10:38 PM (IST)Updated: Sat, 29 Aug 2026 11:43 PM (IST)

भारत द्वारा सिंधु जल संधि निलंबित करने के बाद पाकिस्तान गहरे कूटनीतिक संकट में है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गुहार लगा रहा है

पाकिस्तान गहरे कूटनीतिक संकट और आंतरिक दबाव में आ गया है

पाकिस्तान गहरे कूटनीतिक संकट और आंतरिक दबाव में आ गया है

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डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने के बाद से पाकिस्तान गहरे कूटनीतिक संकट और आंतरिक दबाव में आ गया है। अमेरिका में पाकिस्तानी दूतावास द्वारा आयोजित एक वर्चुअल सेमिनार में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अपनी आंतरिक विफलताओं और कूटनीतिक अलगाव को छिपाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने गिड़गिड़ाना शुरू कर दिया है।

डार ने अप्रैल 2025 में भारत के इस ऐतिहासिक और निर्णायक कदम को आधारहीन बताया और कहा कि इससे पाकिस्तान की जल, खाद्य और राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। उन्होंने यह भी दलील दी कि सिंधु बेसिन 25 करोड़ से अधिक पाकिस्तानियों की जीवन रेखा है।

पाकिस्तान की आबादी तरसी

हालांकि, शांति और सहयोग की बात करने के साथ-साथ उन्होंने परोक्ष रूप से गंभीर परिणामों की चेतावनी देकर अपने आक्रामक और खोखले रवैये को भी जगजाहिर कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान अपनी दशकों पुरानी कुप्रबंधन और आंतरिक संसाधनों की नाकामी का ठीकरा अब जलवायु परिवर्तन और भारत पर फोड़ रहा है।

भारत का स्पष्ट रुख: 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते' पाकिस्तान लगातार इस बात की दुहाई दे रहा है कि जल जैसे प्राकृतिक संसाधनों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की पवित्रता बनी रहनी चाहिए। लेकिन सच तो यह है कि यह पूरा घटनाक्रम अप्रैल 2025 में पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) में हुए उस कायराना आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी।

भारत ने स्पष्ट कर दिया था रुख

इस भीषण हमले के बाद ही भारत ने अपनी जीरो टालरेंस नीति के तहत यह कड़ा और निर्णायक कदम उठाया था। नई दिल्ली ने दुनिया के सामने यह साफ कर दिया है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय सहयोग एक साथ नहीं चल सकते। भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से संचालित होने वाले सीमा पार आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह नष्ट नहीं करता, तब तक 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते'।

भारत अपने इस अडिग और दृढ़ रुख पर पूरी तरह कायम है, जिससे यह साबित होता है कि वह पाकिस्तान की खोखली धमकियों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को बेनकाब कर दिया है, जहां एक तरफ आतंकवाद को संरक्षण दिया जाता है और दूसरी तरफ संकट के समय उसी का रोना रोया जाता है।

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