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चीन के ग्यिरोंग में आपदा का खौफनाक मंजर, 43 की मौत; 49 भारतीयों समेत सैकड़ों लोग अभी भी लापता

Published: Sun, 06 Sep 2026 09:57 PM (IST)

चीन ने 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के 11 दिन बाद ग्यिरोंग पोर्ट की तस्वीरें जारी की हैं, जहां कभी व्यस्त इमिग्रेशन और ट्रेड पोर्ट था।

सांकेतिक तस्वीर।

सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. चीन ने 11 दिन बाद ग्यिरोंग पोर्ट की तबाही दिखाई।

  2. 43 मृत, 519 लापता; कई भारतीय तीर्थयात्री भी शामिल।

  3. ग्लेशियर पिघलने से हिमालय में आपदा का खतरा बढ़ा।

डिजिटल डेस्क, काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ की तस्वीरें दुनिया ने लगातार देखीं, लेकिन चीन की ओर तबाही का पूरा मंजर लंबे समय तक सामने नहीं आया। अब 26 अगस्त की आपदा के 11 दिन बाद चीन ने विदेशी मीडिया को ग्यिरोंग का वह इलाका दिखाया है, जहां कभी नेपाल-चीन सीमा का व्यस्त इमिग्रेशन और ट्रेड पोर्ट हुआ करता था।

तस्वीरों में पांच मंजिला इमिग्रेशन इमारत का नामोनिशान नहीं है। 20 मीटर ऊंजा सीमा द्वार भी मलबे में दब चुका है और आसपास सिर्फ कीचड़, पत्थर और बर्बाद ढांचा दिखाई देता है।

चीन के ताजा आंकड़ों के मुताबिक तिब्बत की ओर 43 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 519 लोग अब भी लापता हैं। इससे पहले जारी सूची में 261 विदेशी नागरिकों को लापता बताया गया था। इनमें 49 भारतीय, 104 नेपाली, 33 लातवियाई, 18 अमेरिकी और 15 ब्रिटिश नागरिक शामिल हैं। भारतीयों में बड़ी संख्या कैलास मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों की थी।

मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए चीनी बचाव दल भारी मशीनों और रडार का इस्तेमाल कर रहे हैं। करीब 1,000 व्यक्तिगत सामान भी बरामद किए गए हैं। मृतकों की पहचान के लिए फिंगरप्रिंट और अन्य तरीकों से जांच की जा रही है। हालांकि, विदेशी राजनयिकों ने पीड़ितों की पहचान में उपलब्ध निगरानी कैमरों और फेस-रिकग्निशन फुटेज के इस्तेमाल तथा परिवारों के साथ जानकारी साझा करने को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

सिर्फ सात मिनट में 22 किमी दूर पहुंचा मलबाचीनी विज्ञान अकादमी के तिब्बती पठार अनुसंधान संस्थान के नेतृत्व में हुए अध्ययन के अनुसार यह सामान्य बाढ़ नहीं थी। नेपाल के लांगटांग लिरुंग क्षेत्र की ऊंचाई पर बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के ढहने से शुरू हुई घटना ने रास्ते में मलबे और पानी को अपने साथ मिलाकर बेहद शक्तिशाली मडस्लाइड का रूप ले लिया।

यह मलबा करीब 22 किलोमीटर की घाटी से होते हुए महज सात मिनट में ग्यिरोंग पोर्ट तक पहुंच गया।विज्ञानियों के अनुसार इस घटना से यह भी पता चलता है कि हिमालय में ग्लेशियर से जुड़ी आपदाओं का खतरा केवल ग्लेशियर टूटने तक सीमित नहीं है। रास्ते में नदियों, झीलों और ढलानों से मलबा जुड़ने पर छोटी घटना कुछ ही मिनटों में बड़े विनाश में बदल सकती है।

ग्लेशियरों के कमजोर होने की चेतावनीचीन के नेशनल क्लाइमेट सेंटर ने भी तिब्बती पठार में बढ़ते खतरे को लेकर चेताया है। केंद्र के मुताबिक पिछले 60 वर्षों में तिब्बती पठार पर ग्लेशियरों का कुल क्षेत्रफल करीब 24 प्रतिशत घटा है और लगभग 7,000 छोटे ग्लेशियर पूरी तरह गायब हो चुके हैं।

तेजी से गर्म हो रहे क्षेत्र में ग्लेशियरों की संरचनात्मक स्थिरता कमजोर पड़ने की आशंका है, जिससे भविष्य में ग्लेशियर से जुड़ी आपदाएं अधिक बार और बड़े इलाके में तबाही मचा सकती हैं।रिमोट सेंसिंग और जमीनी आकलन के मुताबिक चीन में 3,000 से ज्यादा संवेदनशील ग्लेशियल झीलों की पहचान की गई है, जिनमें 187 को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है।