भारतीय नौसेना की बढ़ेगी ताकत, GRSE में निर्मित अगली पीढ़ी के दूसरे गश्ती पोत ‘श्रुति’ का जलावतरण
भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए कोलकाता के जीआरएसई ने अगली पीढ़ी के गश्ती पोत 'श्रुति' का जलावतरण किया। ...और पढ़ें
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भारतीय नौसेना को मिलेगा अगली पीढ़ी का गश्ती पोत
HighLights
जीआरएसई ने नौसेना के लिए 'श्रुति' गश्ती पोत का जलावतरण किया।
यह दूसरा अगली पीढ़ी का अपतटीय गश्ती पोत (एनजीओपीवी) है।
'श्रुति' समुद्री सुरक्षा और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। समुद्री सुरक्षा में भारतीय नौसेना की ताकत और बढ़ने वाली है। कोलकाता स्थित रक्षा पीएसयू गार्डनरीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) ने नौसेना के लिए निर्मित अगली पीढ़ी के स्वदेशी अपतटीय गश्ती पोत (एनजीओपीवी) ‘श्रुति’ का मंगलवार को जलावतरण किया।
यह जीआरएसई द्वारा बनाए जा रहे चार अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोतों में से दूसरा है। पहला पोत ‘संघमित्रा’ का जलावतरण इस वर्ष 20 मई को किया गया था।
‘श्रुति’ का जलावतरण भारतीय नौसेना के युद्धपोत उत्पादन एवं अधिग्रहण नियंत्रक वाइस एडमिरल संजय साधु की पत्नी मणिका साधु ने मंत्रोच्चार और श्लोक पाठ के बीच किया।
कार्यक्रम में वाइस एडमिरल संजय साधु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर जीआरएसई के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) कमोडोर पीआर हरि ने कहा कि कंपनी वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक नौसेना को पांच युद्धपोत सौंपने की योजना पर काम कर रही है।
पीआर हरि ने बताया कि वर्तमान में कंपनी नौ युद्धपोतों का निर्माण कर रही है, जिनमें चार अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत भी शामिल हैं। वर्ष के अंत तक पांच युद्धपोत नौसेना को सौंपने के साथ ही शेष दो एनजीओपीवी का जलावतरण भी किया जाएगा।
अत्याधुनिक एनजीओपीवी पहले बनाए गए अपतटीय गश्ती पोतों की तुलना में अधिक बड़े और ज्यादा समय तक समुद्र में संचालन करने में सक्षम होंगे। यह पोत तटीय सुरक्षा से लेकर निगरानी और समुद्री बचाव अभियान तक कई भूमिकाएं निभाएगा। जलावतरण के बाद फिलहाल ये पोत समुद्र में विभिन्न परीक्षण के दौर से गुजरेगा।
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इस पोत में अत्याधुनिक सेंसर और अन्य उपकरण लगाए जाएंगे। परीक्षण प्रकिया पूरी होने के बाद इसे नौसेना को सौंपा जाएगा।
पोत की 113 मीटर लंबाई और 14.6 मीटर है चौड़ाई
इस पोत की लंबाई करीब 113 मीटर और चौड़ाई 14.6 मीटर है। इसकी वजन क्षमता 3,000 टन होगी। ये पोत अधिकतम 23 नॉट (समुद्री मील) की गति से चल सकेंगे तथा 14 नॉट की गति से करीब 8,500 समुद्री मील तक की दूरी तय करने में सक्षम होंगे।
करीब चार मीटर के कम गहरे ड्राफ्ट के कारण ये पोत तटीय जल क्षेत्र में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे। इनका उपयोग अपतटीय परिसंपत्तियों की सुरक्षा, समुद्री निगरानी, समुद्री अवरोधन तथा तलाशी और जब्ती अभियान में किया जा सकेगा।
मानवीय सहायता और आपदा राहत में भी होगा उपयोग
एनजीओपीवी को निगरानी, माइन वारफेयर और विशेष अभियानों के अलावा समुद्री डकैती रोधी अभियान, घुसपैठ रोकने, काफिला संचालन और गैर-युद्धरत नागरिकों को सुरक्षित निकालने जैसे अभियानों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। ये पोत दूरदराज के क्षेत्रों में आकस्मिक सैन्य अभियानों में भी हिस्सा लेने में सक्षम होंगे।
इसके अलावा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत, खोज और बचाव अभियानों में भी इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें अस्पताल पोत और संचार खुफिया पोत के रूप में भी संचालित किया जा सकेगा। बेड़े के रखरखाव में भी इनकी भूमिका होगी।