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    बंगाल चुनाव: कई सीटों पर निर्णायक साबित हो सकते हैं हिंदीभाषी वोटर, BJP-TMC कर रहीं लुभाने की कोशिश

    Updated: Thu, 16 Apr 2026 07:04 AM (IST)

    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हिंदी भाषी मतदाताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य में लगभग 1.40 करोड़ हिंदी भाषी आबादी है, जिनमें ...और पढ़ें

    HighLights

    1. हिंदी भाषी मतदाता बंगाल चुनाव में निर्णायक भूमिका में।

    2. टीएमसी और भाजपा दोनों लुभाने को अपना रहीं विशेष रणनीति।

    3. लगभग 50-55 सीटों पर हिंदी भाषी वोटर महत्वपूर्ण।

    इंद्रजीत सिंह, कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार हिंदी भाषी मतदाताओं की भी भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य के शहरी और औद्योगिक इलाकों में हिंदीभाषी आबादी का प्रभाव लगातार बढ़ा है, जिसका सीधा असर चुनावी गणित पर पड़ सकता है।

    राजनीतिक दल खासकर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा इस वोट बैंक को साधने के लिए अलग-अलग रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।

    हिंदीभाषी मतदाता को लुभाने की कोशिश

    राज्य की कुल आबादी 10.50 करोड़ के आसपास है। इनमें अनुमानित हिंदी भाषी आबादी लगभग 1.40 करोड़ है, जबकि एक करोड़ के आसपास मतदाता हैं। हिंदीभाषी वोटर कई सीटों पर निर्णायक भूमिका में हैं।

    कोलकाता के बड़ाबाजार, बेहाला, दमदम के अलावा आसनसोल, दुर्गापुर, रानीगंज, खड़गपुर, सिलीगुड़ी, मालदा, हावड़ा और हुगली के औद्योगिक क्षेत्र, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना के शहरी क्षेत्र और उत्तर बंगाल के कुछ हिस्सों में हिंदी भाषियों की अच्छी-खासी तादाद है।

    इन क्षेत्रों में करीब 50 से 55 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां हिंदी भाषी वोटर निर्णायक स्थिति में हैं। हिंदी भाषी वोटर अक्सर एकजुट होकर मतदान करते हैं, जिससे उनका प्रभाव और बढ़ जाता है।

    शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों में है पकड़

    हिंदी भाषी मतदाताओं पर टीएमसी व भाजपा दोनों की नजर है। भाजपा पहले से ही इस वर्ग में मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश में रही है। हिंदी भाषी उम्मीदवारों को टिकट देना और हिंदी में प्रचार अभियान चलाना इसकी रणनीति का अहम हिस्सा है।

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    भाजपा ने हिंदी भाषी व्यापारियों को साधने की कोशिश की है। पूर्व सांसद व भाजपा नेता अर्जुन सिंह का मानना है कि हिंदी भाषी मतदाता उसके पारंपरिक समर्थन आधार का हिस्सा बन सकते हैं, खासकर शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों में।

    दूसरी तरफ टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भी हिंदी भाषियों तक पहुंच बढ़ाने के लिए पहल की है। ममता सरकार ने राज्य के पहले हिंदी विश्वविद्यालय के साथ हिंदी अकादमी की स्थापना की है। छठ पर्व पर दो दिन की सरकारी छुट्टी की भी घोषणा की है।

    हिंदी अकादमी के सदस्य तथा वरिष्ठ टीएमसी नेता अशोक झा का कहना है कि पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह केवल बंगाली नहीं बल्कि हिंदीभाषियों की भी प्रतिनिधि है।

    भाजपा-टीएमसी दोनों ने दिए हिंदी भाषियों को टिकट

    भाजपा व टीएमसी दोनों ने इस बार चुनाव में कई हिंदी भाषी उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं। भाजपा के प्रमुख हिंदी भाषी उम्मीदवारों में नोआपाड़ा से अर्जुन सिंह, भाटपाड़ा से उनके पुत्र पवन सिंह, चौरंगी से संतोष पाठक, कोलकाता पोर्ट से राकेश सिंह, उत्तर हावड़ा से उमेश राय, काशीपुर बेलगछिया से रितेश तिवारी, पांडेश्वर जितेंद्र तिवारी शामिल हैं।

    तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख हिंदी भाषी उम्मीदवारों में बाली से कैलाश मिश्रा, जमुड़िया से हरेराम सिंह, बाराबनी से विधान उपाध्याय व जोड़ासांको से विजय उपाध्याय व अन्य शामिल हैं।

    2021 में भाजपा को मिला था बड़ा समर्थन

    2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने हिंदी भाषी वोटरों में अच्छी पकड़ बनाई थी। विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा को हिंदी भाषी वोटरों का बड़ा हिस्सा मिला, जिससे उसे कई सीटों पर बढ़त मिली।

    2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 77 सीटें मिली थीं। साथ ही, यह वर्ग खुद को मुख्यधारा की राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व चाहता है। यही कारण है कि जो भी पार्टी उन्हें टिकट और नेतृत्व में जगह देगी, उसे इसका फायदा मिल सकता है।

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