सावन का महीना शुरू हो चुका है। सावन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को कल्कि जयंती मनाई जाती है।
यह पर्व जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन भगवान विष्णु के दसवें अवतार भगवान कल्कि की पूजा की जाती है।
जीवन में खुशहाली के लिए इस दिन व्रत भी रखा जाता है। कल्कि पुराण में भगवान कल्कि के अवतार के बारे में बताया गया है।
जब कलयुग में अधर्म बढ़ा जाएगा। उस समय धर्म स्थापना और असुरों के संहार हेतु भगवान कल्कि अवतरित होंगे।
10 अगस्त को कल्कि जयंती मनाई जाएगी। साधक स्नान-ध्यान कर विधि-विधान से भगवान कल्कि की पूजा-उपासना कर सकते हैं।
कल्कि जयंती पर साध्य योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का निर्माण दोपहर 02 बजकर 52 मिनट तक है। इसके बाद शुभ योग का संयोग बन रहा है।
कल्कि जयंती पर साध्य, शुभ एवं रवि योग का भी निर्माण हो रहा है। इन योग में भगवान कल्कि की पूजा करने से साधक को मनचाहा वर प्राप्त होगा।
सनातन शास्त्र कल्कि पुराण, भविष्य पुराण और स्कंद पुराण में भगवान कल्कि के अवतरण के बारे में विस्तार से इसके बारे में बताया गया है।
10 अगस्त को कल्कि जयंती मनाई जाएगी। अध्यात्म से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहें jagran.com