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    हर्षिल में सुरक्षात्मक कार्यों में देरी से फिर बढ़ा आपदा का खतरा, खतरे की जद में कोतवाली- GMVN गेस्ट हाउस

    Updated: Sat, 27 Jun 2026 09:15 PM (IST)

    सुरक्षात्मक कार्यों में देरी के कारण प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हर्षिल फिर आपदा के मुहाने पर खड़ा है। ...और पढ़ें

    हर्षिल जीएमवीएन के पास क्षतिग्रस्त भागीरथी नदी तट से लगी सुरक्षा दीवार। स्रोत सुधि पाठक

    हर्षिल जीएमवीएन के पास क्षतिग्रस्त भागीरथी नदी तट से लगी सुरक्षा दीवार। स्रोत सुधि पाठक

    HighLights

    1. हर्षिल में सुरक्षात्मक कार्यों में देरी से आपदा का खतरा बढ़ रहा है

    2. पिछले साल की बाढ़ से क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत धीमी गति से

    3. सरकारी व निजी संपत्तियों को खतरा, चैनलाइजेशन कार्य भी धीमा

    जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हर्षिल फिर आपदा के मुहाने पर खड़ा है। सुरक्षात्मक कार्यों में देरी से हर्षिल में आपदा का खतरा बना हुआ है।

    यहां बीते वर्ष तेल गाड़, खीरगंगा नदी के साथ भागीरथी नदी के उफान पर आने से नदी किनारे जीएमवीएन गेस्ट हाउस व हर्षिल कोतवाली भवन खतरे की जद में आ गया था।

    वहीं, नदी किनारे की सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त हो गई थी। लेकिन समय रहते इनकी मरम्मत व सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं किए गए। वर्तमान में चल रहे चैनलाइजेशन कार्य की गति भी धीमी है।

    जिला मुख्यालय से करीब 80 किमी की दूरी पर गंगोत्री हाईवे किनारे स्थित हर्षिल प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां करीब डेढ़ हजार की आबादी निवास करती है।

    वहीं, चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्री गंगोत्री धाम के साथ हर्षिल का भी भ्रमण करना नहीं भूलते हैं। बीते वर्ष अगस्त माह में जब हर्षिल व धराली क्षेत्र में आपदा आई तो यहां भारी नुकसान हुआ था।

    भागीरथी नदी के उफान के कारण हुए कटाव के चलते हर्षिल कोतवाली व गढ़वाल मंडल विकास निगम के अतिथि गृह सहित अन्य नदी किनारे बने होटल व होमस्टे को खाली करा लिया गया गया था।

    जिसके बाद यहां सुरक्षात्मक कार्यों के लिए करीब आठ माह से अधिक का समय था। लेकिन यहां कुछ एक स्थानों पर वायरक्रेट (तार के जालों में भरे गए पत्थर) लगाकर इतिश्री कर ली गई।

    यहां बीते वर्ष हर्षिल आर्मी कैंप के पास से बहने वाला ककोड़ागाड भी उफान पर आया था,इससे ककोड़ागाड के किनारे लगी सुरक्षा दीवारें भी क्षतिग्रस्त हुई थी, लेकिन यहां भी पुख्ता सुरक्षा इंतजाम नहीं हो पाए हैं।

    पूर्व ग्राम प्रधान दिनेश रावत सुंदर सिंह, विद्या सिंह, विनोद आदि का कहना है कि चैनलाइजेशन कार्य की गति भी धीमी है।

    वहीं, सुरक्षात्मक कार्य पूरे नहीं होने से यहां सरकारी व निजी परिसंपत्तियों को खतरा बना हुआ है। उन्होंने शासन-प्रशासन से चैनलाइजेशन के साथ सुरक्षा व मरम्मत कार्यों में तेजी लाए जाने की मांग की है।

    स्वीकृति व टेंडर प्रक्रिया में देरी के चलते सुरक्षात्मक कार्य शुरू होने में समय लगा, जो कि गत मई माह में ही शुरू हुए, जिसमें नदी किनारे आरसीसी दीवारों का निर्माण होगा। करीब 10 करोड़ लागत से सुरक्षात्मक कार्य को एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य है। लेकिन इसे एक वर्ष से पहले ही पूरा करा लिया जाएगा।

    -सचिन सिंघल, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग।

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