हर्षिल में भागीरथी नदी का बढ़ा जलस्तर: तटवर्ती इलाकों में कटाव का खतरा, दहशत के साए में कटी लोगों की रात
हर्षिल में भागीरथी नदी का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती क्षेत्रों में दहशत है, जहां मलबे के ढेर में दरारें आ गई हैं और कटाव का खतरा बढ़ गया है। पिछले साल की ...और पढ़ें

हर्षिल में भागीरथी नदी का जलस्तर बढ़ने से उत्पन्न खतरे का जायजा लेते आपदा प्रबंधन अधिकारी व अन्य। स्रोत सूचना विभाग
HighLights
भागीरथी नदी का जलस्तर बढ़ने से हर्षिल में दहशत का माहौल।
नदी किनारे लगाए मलबे के ढेर में दरारें, कटाव का खतरा।
जीएमवीएन गेस्ट हाउस, हर्षिल कोतवाली भवन को फिर खतरा।
जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी। पर्यटन स्थल हर्षिल में भागीरथी नदी के बढ़ते जलस्तर से तटवर्ती क्षेत्र के लोगों की नींद उड़ी हुई है। बीते शनिवार को भी यहां नदी का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती क्षेत्र में बसे लोगों की रात दहशत के साए में कटी। यहां चैनलाइजेशन कर किनारे लगाए गए मलबे के ढेर पर भी दरारें पड़ गई है।
नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर की चपेट में आकर मलबा बहता है तो इससे नदी का प्रवाह सीधे मुखवा के नीचे से हर्षिल की तरफ होने की आशंका है, जिससे गढ़वाल मंडल विकास निगमन के गेस्ट हाउस सहित हर्षिल कोतवाली भवन की ओर कटाव बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
भागीरथी नदी में चैनलाइज कर किनारे किए गए मलबे पर पड़ी दरारें
दरअसल, बीते वर्ष मानसून सीजन में हर्षिल व धराली आपदा की चपेट में आए थे, तब भी नदी का जलस्तर बढ़ने से हर्षिल में जीमएवीएन गेस्ट हाउस सहित हर्षिल कोतवाली खतरे की जद में आ गए थे, हर्षिल कोतवाली के भूतल भी को भी नदी के साथ बहकर आए मलबे से नुकसान पहुंचा था। लेकिन यहां करीब 9 महीने तक भी सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं हो सके, सुरक्षा कार्यों में देरी के चलते हर्षिल अब फिर आपदा का खतरा मंडरा रहा है।
कटाव बढ़ने का खतरा, गेस्ट हाउस के पास लगाए पुश्ते के नीचे घुसा पानी
वर्तमान में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से नदी का जलस्तर बढ़ता जा रहा है। इससे नदी के प्रवाह का चैनलाइजेशन कर किनारे लगाए गए मलबे का लगातार कटाव हो रहा है बीते शुक्रवार रात को मलबे का बड़ा टीला बह गया था, शनिवार को भी यहां नदी का जलस्तर बढ़ने से लोग दहशत में रहे और टार्च से नदी के जलस्तर का जायजा लेते रहे।
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प्रशासन से समय रहते सुरक्षात्मक कदम उठाने की मांग की
स्थानीय सुंदर सिंह, दिनेश, रमेश आदि ने बताया कि बीते वर्ष हर्षिल-धराली के बीच बनी झील को भी पूरी तरह नहीं खोला जा सका है, वहीं, हर्षिल-धराली के बीच बड़े पैमाने पर नदी में मलबा जमा है, जिसका चैनलाइजेशन ठीक ढंग से नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसूनी वर्षा बढ़ने के साथ खीर गंगा व तेल गाड उफान पर आए तो हर्षिल में खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से समय रहते सुरक्षात्मक कदम उठाने की मांग की है।
आपदा प्रबंधन विभाग व सिंचाई विभाग की टीम ने हर्षिल में संभावित खतरे का जायजा लिया है। सिंचाई विभाग को हर्षिल में तीन दिन के अंदर सुरक्षा के मध्येनजर वायर क्रेट लगाने के निर्देश दिए गए हैं। भागीरथी नदी के जलस्तर की निगरानी भी करवाई जा रही है।
प्रशांत आर्य, जिलाधिकारी उत्तरकाशी।