मणिपुर उग्रवादी हमला: डेढ़ महीना पहले ही खोए थे पिता, अब बलिदान हुआ बेटा; हर आंख नम
हवलदार चंद्रमोहन सिंह के मणिपुर में बलिदान होने से उनके पैतृक गांव डांडातोली में गहरा सन्नाटा पसरा है, जहां लोग शोक में डूबे हैं। ...और पढ़ें

मणिपुर में हवलदार चंद्रमोहन सिंह के बलिदान से उनके गांव में माहौल बेहद गमगीन।

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संवाद सूत्र, धुमाकोट। मणिपुर के उखरुल में उग्रवादियों के हमले में ग्राम डांडातोली निवासी हवलदार चंद्रमोहन सिंह के बलिदान होने के बाद पूरे क्षेत्र में माहौल गमगीन है। बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी डांडातोली गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में सन्नाटा पसरा रहा और तमाम आंखें नम नजर आईं।
जैसे-जैसे हवलदार चंद्रमोहन सिंह के बलिदान की खबर क्षेत्र में फैल रही है, वैसे-वैसे डांडातोली गांव में शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लग रहा है। गांव में मौजूद चंद्रमोहन के छोटे भाई की पत्नी और भतीजे को ढांढस बंधाने के लिए आसपास के ग्रामीण व रिश्तेदार पहुंच रहे हैं। हर कोई उनके मिलनसार स्वभाव को याद कर भावुक नजर आया।
डेढ़ महीना पहले ही खोए थे पिता
स्वजन और ग्रामीणों के अनुसार, परिवार अभी चंद्रमोहन के पिता गोविंद सिंह के असामयिक निधन के दुख से उबर भी नहीं पाया था कि डेढ़ महीने के भीतर ही परिवार पर यह दूसरा पहाड़ टूट पड़ा।
चंद्रमोहन पिता के श्राद्ध कर्म निपटाकर जून के आखिरी हफ्ते में ही ड्यूटी पर लौटे थे। 27 जून को गांव से गाजियाबाद गए। गाजियाबाद से तीन जुलाई को ड्यूटी पर वापस लौट गए थे। इसके महज कुछ ही दिनों बाद आई इस हृदयविदारक सूचना से उनके पीछे रह गईं पत्नी, बेटे और दो बेटियों पर दुखों का पहाड़ टूट गया है।