53 साल बाद कुमाऊं में मल्लिकार्जुन खरगे का शंखनाद, हल्द्वानी से साधा तराई और पहाड़
मल्लिकार्जुन खरगे ने 53 साल बाद कुमाऊं के हल्द्वानी में विजय शंखनाद रैली की, जहां उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधा और कांग्रेस को मजबूत करने का आह् ...और पढ़ें

कांग्रेस की कुमाऊं के प्रवेशद्वार से तराई संग पहाड़ को साधने की कोशिश।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
गोविंद बिष्ट, हल्द्वानी। कुमाऊं के द्वार कहे जाने वाले हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विजय शंखनाद रैली के जरिये तराई से लेकर पहाड़ और सीमांत तक को साधने की।
भौगोलिक परिस्थिति भले अलग हो लेकिन मंडल से जुड़ी 29 विधानसभा सीटें इस छोटे से राज्य में किसी भी दल की चुनावी नैय्या पार लगाने के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती हैं।
हर चुनाव में देहरादून के बाद यहां शक्ति प्रदर्शन जरूर
स्व. डा. इंदिरा हृदयेश के गढ़ माने जाने वाली हल्द्वानी विधानसभा की खासियत है कि हर चुनाव में देहरादून के बाद यहां शक्ति प्रदर्शन जरूर किया जाता है। राजधानी में छात्रों की गूंज कार्यक्रम के बाद से ही विजय शंखनाद रैली की तैयारियां शुरू हो गई थीं।
रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि 53 साल पहले 1973 में वह पंतनगर यूनिवर्सिटी आए थे, तब वह विधायक थे। यहां के लोग सभ्य और आदर्शवादी के साथ ही बहादुर भी हैं। इस भ्रष्ट और जनविरोधी सरकार को वह उखाड़कर ही दम लेंगे।
वहीं, भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि इनका असली स्लोगन है यहां पैसा बोलता है। इसलिए नौकरियां बेची जा रही हैं। इसके बाद खरगे ने कार्यकर्ताओं से लाओ, लाओ....कांग्रेस लाओ के नारे भी लगवाए।
कहा कि दून में गढ़वाल मंडल से जुड़े अलग-अलग हिस्सों के लोग नौकरी, रोजगार, पढ़ाई और अन्य कारणों से स्थायी-अस्थायी तौर पर बसे हुए हैं। वैसी स्थिति हल्द्वानी की भी है। यहां रुद्रपुर से सीमांत क्षेत्र धारचूला-मुनस्यारी तक के लोग मिलेंगे, जिनकी जड़ें अब भी पैतृक गांवों से जुड़ी हुई हैं। साथ ही ऊधम सिंह नगर और नैनीताल जिले का केंद्र होने के कारण कार्यकर्ताओं को भी आने-जाने में परेशानी नहीं होती।
खास बात यह है कि कुमाऊं की 29 में से 15 सीटें इन दो जिलों से जुड़ी हैं। इसलिए कांग्रेस को लगता है कि आम लोगों तक अपनी बात पहुंचाने और कार्यकर्ताओं में चुनावी जोश भरने को दून के बाद कुमाऊं के प्रवेशद्वार में सियासी ताकत दिखाना जरूरी है। राज्य गठन से लेकर अब तक हुए पांच विधानसभा चुनाव में से चार बार कांग्रेस ने हल्द्वानी सीट पर जीत हासिल की है।
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कांग्रेस की वरिष्ठ नेता स्व. डा. इंदिरा हृदयेश तीन बार विधायक रहीं। उनके निधन के बाद पिछले चुनाव में बेटे सुमित विधायक बने। ऐसे में कांग्रेस के रणनीतिकारों को लगता है कि इस शहर में किसी बड़े कार्यक्रम में भीड़ जुटाने से लेकर मैनेजमेंट तक में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
ऐ चुप बैठो.......सुनो
रैली के दौरान पंडाल में मौजूद युवाओं की ओर से बीच-बीच में नारेबाजी की जा रही थी। जिस पर वरिष्ठ नेताओं ने शांत रहने को कहा। संबोधन में नारेबाजी होने पर खरगे ने कार्यकर्ताओं को डांट भी लगा दी। बोले, ऐ चुप रहो.....सुनो।