Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    हरिद्वार: बहू-बेटे ने घर से निकाला, बहुमंजिला मकान होने के बाद भी बुजुर्ग मां को नहीं दिया आशियाना

    Updated: Sun, 05 Apr 2026 12:20 PM (IST)

    हरिद्वार में एक बुजुर्ग मां, महेंद्र कौर, को अपने बहुमंजिला मकान में बेटे-बहू ने आश्रय नहीं दिया। पति की मृत्यु के बाद बेटे को गैस एजेंसी सौंपने पर उन ...और पढ़ें

    इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

    इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, हरिद्वार। बहू-बेटा और अपना बहुमंजिला मकान होने के बावजूद हुए एक बुजुर्ग मां को घर में आसरा नहीं मिला। उप जिलाधिकारी न्यायालय का निर्णय भी लाचार व मजबूर वृद्धा के लिए महज एक दस्तावेज साबित हुआ।

    कनखल क्षेत्र के हिमगिरी विहार, विष्णु गार्डन निवासी गायत्री प्रसाद की मई 2023 में लंबी बीमारी से मौत के साथ ही उनकी पत्नी महेंद्र कौर के जीवन में कठिनाइयां शुरू हो गईं थीं। पति की विरासत को सुरक्षित रखने की चाह में उन्होंने और अन्य उत्तराधिकारियों ने गैस एजेंसी का स्वामित्व अपने बेटे को सौंप दिया।

    यह लगाए आरोप

    आरोप है कि इसके बाद बेटे और बहू का व्यवहार धीरे-धीरे कठोर होता गया। अभद्रता और झगड़ा आम बात होने की जानकारी स्थानीय निवासियों ने भी पुलिस को दी। वरिष्ठ नागरिक संरक्षण अधिनियम 2007 के तहत माता-पिता को भरण-पोषण और देखभाल का अधिकार प्राप्त है। यदि संतान माता-पिता को प्रताड़ित करती है या घर से बाहर निकालती है, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसी कानून का सहारा तो मिला, लेकिन अधूरा।

    दरअसल उपजिलाधिकारी न्यायालय ने पीड़िता की याचिका स्वीकार कर मकान का ऊपरी तल रहने और भरण-पोषण के लिए 10 हजार प्रति माह देने के निर्णय भी दिया, शुरू में तीन माह तो 10-10 हजार रुपये दिए गए, लेकिन बाद में वह बंद कर दिया गया।

    पिछले दिनों पीड़िता ने पुलिस को उपजिलाधिकारी न्यायालय का आदेश दिखाते हुए मकान में दाखिल करने की गुहार लगाई। पुलिस ने पहले तो मामले को पारिवारिक बताकर टालने का प्रयास किया, बाद पीड़िता के समर्थन आए स्थानीय निवासियों के प्रयास करने पर मकान के ऊपर तल पर पहुंचा दिया। लेकिन कमरे में कोई भी सामान नहीं होने पर उन्हें वापस आना पड़ा।

    खबरें और भी

    बहू-बेटे की बेरुखी से तंग पीड़िता की आंख से आंसू अक्सर बहते हैं। लोग दबी जुबान से दर्द बयान कर रहे हैं कि माता-पिता के त्याग और प्रेम की कोई कीमत नहीं बची। यह व्यथा सिर्फ महेंद्र कौर की नहीं, बल्कि हर उस मां की है, जिसने अपने बच्चों को अपना सर्वस्व दिया और बदले में अपमान और आंसू पाए। फिलहाल महिला अपने कमरे में खुद अपना ताला लगाकर चली गई हैं।

    यह भी पढ़ें- हरिद्वार: पत्नी निकली कातिल, शराब में नींद की गोली मिलाकर पिलाई; फिर बेटी के साथ तकिये से मुंह दबाकर की हत्या

    यह भी पढ़ें- हरिद्वार में दिल्ली-देहरादून हाईवे पर हादसा, दो ट्रकों की टक्कर में एक मौत