उत्तराखंड में वर्षा और भूस्खलन ने बढ़ाई परेशानी, नेपाल बॉर्डर से लगे गांवों का टूटा संपर्क
उत्तराखंड में भारी वर्षा और भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित हुआ है, जिससे चंपावत में नेपाल सीमा से लगे गांवों का ...और पढ़ें

उत्तराखंड में वर्षा और भूस्खलन ने बढ़ाई परेशानी।
HighLights
चंपावत में नेपाल सीमा से लगे गांवों का संपर्क टूटा।
बदरीनाथ राजमार्ग भूस्खलन से बाधित, छोटे वाहन ही चल रहे।
राज्य में 54 मार्ग अवरुद्ध, पर्वतीय जिलों में येलो अलर्ट।
जागरण संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में वर्षा व भूस्खलन ने परेशानी बढ़ाई हुई है। चंपावत में नेपाला सीमा तक जाने वाला टनकपुर-जौलजीबी मार्ग को भूस्खलन से भारी नुकसान पहुंचा है। भूस्खलन इतना जबरदस्त था कि मलबा दूसरी ओर काली नदी तक पहुंच गया है। इसके चलते नेपाल सीमा से लगे भारतीय गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह कट गया है।
चमोली में बदरीनाथ राजमार्ग विष्णुप्रयाग और मारवाड़ी क्षेत्र के बीच भूस्खलन के कारण खतरनाक हो गया है। जिले के नंदानगर-सुतोल टैक्सी स्टैंड के पास पहाड़ी से गिरे मलबे से दो वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।
पिथौरागढ़ में बुधवार को भूस्खलन से अवरुद्ध कैलास मानसरोवर यात्रा राजमार्ग (टनकपुर-लिपुलेख) को गुरुवार दोपहर दो बजे वाहनों की आवाजाही के लिए खोला जा सका।
चमोली में बदरीनाथ राजमार्ग मारवाड़ी पुल के पास धंसने व मलबा आने से सुबह करीब चार घंटे बाधित रहा। फिलहाल राजमार्ग पर छोटे वाहनों की आवाजाही ही हो रही है। राजमार्ग बाधित होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
नंदानगर-सुतोल टैक्सी स्टैंड के पास पहाड़ी से भूस्खलन के बाद आए मलबे की चपेट में आकर सड़क किनारे खड़े दो वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। राज्य में 54 मार्ग मलबा आने से बाधित चल रहे हैं। 16 मार्ग आंशिक तौर पर प्रभावित हैं। मौसम विभाग ने शुक्रवार को राज्य के पर्वतीय जिलों में तेज वर्षा यलो अलर्ट जारी किया है।
