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    देहरादून में कुमार विश्वास का 'काकरोच जनता पार्टी' पर तीखा वार, बोले- 'हिट' से होगा सफाया

    Updated: Sat, 23 May 2026 09:21 PM (IST)

    देहरादून में एक कार्यक्रम के दौरान कवि कुमार विश्वास ने "काकरोच जनता पार्टी" पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि "काकरोच" हैं, तो उन्हें ख ...और पढ़ें

    देहरादून में पत्रकारों से बातचीत करते प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास।

    देहरादून में पत्रकारों से बातचीत करते प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास।

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    संवाद सहयोगी, डोईवाला (देहरादून)। देहरादून स्थित लेखक गांव में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास ने “काकरोच जनता पार्टी” को लेकर पूछे गए सवाल पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर “कॉकरोच” हैं, तो देश में “हिट” भी मौजूद हैं।

    उन्होंने कहा कि बचपन से सुनते आए हैं कि काकरोच एक ऐसा कीड़ा है, जो गंदगी में पनपता है। उसे खत्म करने के लिए बाजार में कई तरह की दवाइयां मौजूद हैं।

    डॉ. विश्वास ने कहा कि उनकी मां बताया करती थीं कि काकरोच अंधेरे में और झुंड में रहता है तथा अच्छी चीजों को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति रखता है। उन्होंने आगे कहा कि काकरोच सड़न से पैदा होता है और यह एक त्याज्य जीव है।

    तंज भरे अंदाज में उन्होंने कहा कि अगर कॉकरोच हैं, तो उन्हें खत्म करने के लिए “हिट” भी मौजूद है। बंगाल और पंजाब का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों का इलाज हो जाएगा।

    लेखक गांव में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी

    लेखक गांव में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में पहुंचे प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास ने कहा कि लेखक गांव भारतीय साहित्य, संस्कृति और संवेदनाओं का जीवंत केंद्र बनता जा रहा है, जहां नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ना सीख रही है।

    ‘सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में उन्होंने युवाओं से साहित्य और पुस्तकों के साथ अधिक समय बिताने की अपील की। उन्होंने कहा कि अच्छी कविता लिखने के लिए पहले हजार कविताएं पढ़नी पड़ती हैं। इस दौरान उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पंक्तियां ‘मैं तुम्हें सपने देने आया हूं, बेचने नहीं’ सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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    कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि सुमित्रानंदन पंत का साहित्य प्रकृति, हिमालय और भारतीय संस्कृति की चेतना का जीवंत दस्तावेज है। कार्यक्रम में पद्मश्री कल्याण सिंह रावत समेत कई साहित्यकार, शिक्षाविद और छात्र मौजूद रहे।

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