हेल्दी की जगह जंक फूड बना रहा बच्चों को बीमार, बच्चे हो रहे हैं मोटापे का शिकार
बच्चों में जंक फूड की बढ़ती लत उन्हें बीमार बना रही है। स्वाद और सुलभता के कारण बच्चे फास्ट फूड ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
सुमित थपलियाल, जागरण देहरादून। सेहतमंद रहने के लिए पौष्टिक भोजन जरूरी है। स्वाद, आसानी से उपलब्धता, कम कीमत और सुविधा के कारण बच्चे फास्ट फूड की ओर से अधिक आकर्षित हो रहे हैं।
इसकी लत लगने से बच्चे और अभिभावक इनके दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव को नहीं समझते।
अक्सर देखने में आता है कि नाश्ते के लिए अधिकांश अभिभावक बच्चों के टिफिन में चिप्स, कुरकुरे, मैगी, सैंडविच आदि रखते हैं।
बाद में यह उनकी जिद बन जाती है और अभिभावक चाहते हुए भी उन्हें घर में बना भोजन नहीं खिला पाते।
जंक फूड जितना स्वादिष्ट लगते हैं, उतने ही सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। चिंताजनक है कि जंक फूड्स ने बच्चों के दैनिक आहार पर एक तरह से कब्जा कर लिया है।
इसके खामियाजे के तौर पर बच्चों को मोटापे की बढ़ती महामारी से जूझना पड़ता है। इसके अलावा कम उम्र में शुगर, पाचन तंत्र में गड़बड़ी, मानसिक एवं शारीरिक बीमारी बढ़ रही है।
बाल रोग विशेषज्ञ, डायटीशियन और योग शिक्षक भी बताते हैं कि यदि बच्चों को प्यार से पौष्टिक और स्वादिष्ट खाना खिलाएंगे और जंक फूड के नुकसान के बारे में बताएंगे तो बच्चा वही खाएगा जो आप उसे देंगे।
डाक्टरों के पास हर दूसरा अभिभावक यही शिकायत लेकर आ रहा है कि उनका बच्चा फास्ट फूड अधिक जबकि खाना नहीं खाता।
आजकल लोग व्यस्त होने के कारण खुद और बच्चों की सेहत का ध्यान नहीं रख पा रहे हैं। मोमोज, चाऊमीन, बर्गर और पिज्जा जैसे फूड बच्चों की पहली पसंद हैं। यह स्वादिष्ट जंक फूड भले ही आपकी जीभ को खुश कर रहा हो, लेकिन सेहत के लिए धीरे-धीरे जहर का काम कर रहा है। बच्चों के लिए इससे दूरी जरूरी है।
डा. रोहित ठाकुर, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल (कोरोनेशन)फास्ट फूड को बनाने में इस्तेमाल होने वाला तेल कई बार गर्म होता है। ऐसे में यह फैट बढ़ाता है। इससे बेड कोलेस्ट्राल बढ़ता है और गुड कोलेस्ट्राल घट जाता है। नतीजा, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा कई गुना अधिक बढ़ जाता है। मोमोज और चाऊमीन जैसी चीजों में मैदा, ज्यादा तेल और हाई कार्बोहाइड्रेट होता है। जो ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा देती हैं।
- डा. आशीष सेठी, बाल रोग विशेषज्ञ, श्रीमहंत इंदिरेश अस्पतालआजकल जिस उम्र के पड़ाव में भोजन अच्छा होना चाहिए, उसी उम्र में खराब भोजन मिल रहा है। इससे आगे चलकर यह गंभीर बीमारी भी धारण कर लेती है। मोमो, चाऊमीन और अन्य तरह के फास्ट फूड, बाहर का खाने से यदि बच्चों का मोटापा बढ़ रहा है तो उन्हें योगासन कराएं। सूर्यनमस्कार से शारीरिक लाभ मिलेगा। बच्चों को शारीरिक क्रियाकलाप जोड़ना, खेलना, मिलना-जुलना शुरू होने से बच्चों के बदलाव नजर आएगा।
-डा. हिमांशु मोहन, योग गुरु व संचालक कायाकल्प योग स्टूडियो जीएमएस रोड।
इन बातों का रखें ध्यान
- जंक फूड में पोषण मूल्य बहुत कम जबकि अक्सर वसा, चीनी, नमक और कैलोरी की मात्रा अधिक होने से नुकसान देती है।
- बच्चों को फल, सब्जी व साबूत अनाज खिलाएं। स्वस्थ खान-पान की आदतें घर से शुरू करें और बच्चों को सिखाएं।
- नूडल्स, पिज्जा, बर्गर, शीतल पेय के लगातार सेवन से पाचन तंत्र और मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- जंक फूड से बचें। इसमें पोषक तत्वों की कमी होने के कारण बच्चों में कब्ज और गंभीर संक्रमण का कारण बनती है।
- टाफी अथवा चाकलेट की जगह बच्चों को स्टेशनरी या अन्य शैक्षिक चीजें उपहार में दें।
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