दून की बेटी वैशाली ने समंदर की लहरों पर लिखी नई इबारत, पूरी की 25500 नॉटिकल मील की समुद्री परिक्रमा
दून की बेटी स्क्वाड्रन लीडर वैशाली भंडारी ने नौ महिला अधिकारियों के ऐतिहासिक दल के साथ पहली संयुक्त वैश्विक समुद्री परिक्रमा पूरी की है। ...और पढ़ें
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स्क्वाड्रन लीडर वैशाली भंडारी।
HighLights
वैशाली भंडारी ने वैश्विक समुद्री परिक्रमा पूरी कर इतिहास रचा।
नौ महिला अधिकारियों के दल ने 25,500 नॉटिकल मील तय किए।
राष्ट्रपति और रक्षा मंत्री ने इस असाधारण उपलब्धि को सराहा।
जागरण संवाददाता, देहरादून। दून की बेटी स्क्वाड्रन लीडर वैशाली भंडारी ने समुद्र की चुनौतीपूर्ण लहरों को पार करते हुए बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वह तीनों सेनाओं की उन नौ महिला अधिकारियों के ऐतिहासिक दल का हिस्सा रहीं, जिसने पहली बार संयुक्त रूप से समुद्र की वैश्विक परिक्रमा पूरी की।
इस अभियान में स्वदेशी नौका आइएनएसवी त्रिवेणी पर 10 महीने में 25,500 नाटिकल मील की दूरी तय की गई। इस दौरान दल ने हिंद महासागर, प्रशांत महासागर और दक्षिण अटलांटिक की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना किया।
दल ने आस्ट्रेलिया के फ्रेमैंटल, न्यूजीलैंड के लिटलटन, अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स और दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में पड़ाव किए। इस यात्रा में दल ने भूमध्य रेखा को दो बार पार किया और केप लीविन तथा केप हार्न जैसे चुनौतीपूर्ण समुद्री क्षेत्रों को पार किया।
इस अभियान की एक बड़ी चुनौती तेज हवाओं और ऊंची लहरों के बीच नौका को आगे बढ़ाना था। लंबे समय तक समुद्र में रहना, मौसम के बदलते मिजाज के बीच निर्णय लेना और सीमित संसाधनों में तालमेल बनाए रखना भी कठिन था।
गत माह मुंबई लौटे दल का रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वागत किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दल से मुलाकात की और उनकी असाधारण उपलब्धि के लिए उन्हें सम्मानित किया। वैशाली की उपलब्धि दून के लिए गौरव का विषय है।
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उत्तराखंड का बढ़ाया मान
वैशाली ने डालनवाला स्थित दून इंटरनेशनल स्कूल और केवि ओएनजीसी से पढ़ाई की। इसके बाद डीएवी पीजी कालेज से स्नातक किया। कालेज के दौरान एनसीसी प्रशिक्षण ने उनके व्यक्तित्व में अनुशासन और सैन्य जीवन के प्रति रुचि विकसित करने में भूमिका निभाई।
इसके बाद उन्होंने हैदराबाद स्थित वायुसेना अकादमी से प्रशिक्षण लिया और भारतीय वायुसेना की अकाउंट्स शाखा में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया। वैशाली के इस सफर में परिवार का संघर्ष भी जुड़ा है। उनके पिता राजन भंडारी का करीब आठ वर्ष पहले निधन हो गया था।
वह अमूल पार्लर चलाते थे, जिसे अब परिवार ने किराये पर दे रखा है। मां भारती भंडारी गृहिणी हैं। बड़ी बहन प्रियंका की शादी हो चुकी है, जबकि छोटा भाई हर्षद अमेरिका में इंजीनियर है। उनका सफर बताता है कि अनुशासन, साहस और दृढ़ संकल्प के बूते मंजिल की सीमाएं कितनी भी दूर क्यों न हों, उन्हें हासिल किया जा सकता है।