मां राजराजेश्वरी नंदा देवी छह माह बाद कुरुड़ मंदिर में हुईं विराजमान, भक्तों में उत्साह
मां राजराजेश्वरी नंदा देवी छह माह बाद अपने ननिहाल देवराड़ा से सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर लौट आई हैं। 25 दिसंबर को देवराड़ा से प्रस्थान कर देवी की डोली ने 1 ...और पढ़ें

मां राजराजेश्वरी नंदा देवी सिद्धपीठ कुरुड़ में स्थित मंदिर में विराजमान हो गई है।
HighLights
मां नंदा देवी छह माह बाद कुरुड़ मंदिर लौटीं।
देवी की डोली ने 19 पड़ावों पर रात्रि विश्राम किया।
उत्तरायण पर कुरुड़ मंदिर में देवी विराजमान हुईं।
संवाद सहयोगी जागरण गोपेश्वर। छह माह तक अपने ननिहाल देवराड़ा में रहने के बाद मंगलवार को मां नंदा के जयकारों से कुरुड़ क्षेत्र गुंजायमान रहा। देवी की डोली ने अपने ननिहाल देवराड़ा मंदिर से 25 दिसंबर को प्रस्थान किया था।
मा नंदा राजराजेश्वरी की हर साल लोकजात आयोजित की जाती है। इसमें मा नंदा की डोली अपने ननिहाल देवराड़ा में विराजमान होती है। छह माह वहां प्रवास के बाद देवी की डोली सिद्धपीठ कुरुड़ पहुंचती है और यहां देवी की डोली छह माह तक विराजमान रहती है।
इस साल देवी की डोली ने 25 दिसंबर को अपने ननिहाल देवराड़ा मंदिर से प्रस्थान किया। 19 पड़ावों पर रात्रि विश्राम किया। जिसमें बजवाड़, मेलठा, किमनी, नैल, कुलसारी, नोण, मेटा तल्ला, गैरबारम, बामणगांव, देवपुरी, नागोली, मरोड़ा, हंसकोटी, बैनोली, पैठाणी, सिमली, सणकोट, सैती शामिल हैं।
नंदा की डोली हर साल उत्तरायण पर अपने मंदिर में पहुंचती हैं। बुधवार को सूर्य मकर में आ जाते हैं और सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं।
सोमवार को देवी की डोली वापसी के अंतिम पड़ाव सैती पहुंची। ग्रामीणों ने फूलमालाओं से देवी की डोली का स्वागत किया। कर्तन भजन का आयोजन किया।
मंगलवार को पूजा अर्चना के बाद देवी की डोली सिद्धदेश्वर महादेव मंदिर नंदानगर होते हुए सिद्धपीठ कुरुड मंदिर पहुंची। जहां देवी की डोली छह माह के लिए विराजमान हो गयी।
इस दौरान हल्द्वानी से आए मा नंदा के भक्त सुरेश प्रेमी व उनकी टीम ने भंडारे का आयोजन किया। मंदिर में गौड़ पुजारी मेशचंद्र, मनोहर प्रसाद, किशोर प्रसाद, विजय प्रसाद, पारेश्वर गौड़, दिनेश गौड़ के साथ ही कई भक्तगण मौजूद रहे।