वाराणसी में जमीन में धंस गया हैंडपंप तो लोग बोले - 'नल धंसा कहां है? वह तो नीचे पानी भरने गया है'
सरकारी लापरवाही के कारण वाराणसी के टोडरपुर गांव में दो साल पहले रीबोर किया गया एक हैंडपंप जमीन में धंस ...और पढ़ें

वाराणसी में सरकारी लापरवाही से धंसा हैंडपंप, ग्रामीणों ने कसा तंज।
HighLights
वाराणसी के टोडरपुर गांव में हैंडपंप जमीन में धंसा।
दो साल पहले रीबोर होने के बाद नहीं बना चबूतरा।
ग्रामीणों ने सरकारी लापरवाही पर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दी।
जागरण संवाददाता, वाराणसी (मिर्जामुराद)। सरकारी विभाग की कारस्तानी तो देखिए नल को दोबारा रीबोर करके दो साल से छोड़ दिया और फर्श के साथ बोरिंंग को पक्का नहीं करने का खामियाजा जो सामने आया है उससे गांव के लोग हैरान परेशान तो नहीं लेकिन सरकारी कारस्तानी से दुखी जरूर हैं। जिस नल को दुरुस्त करना था वह आखिरकार जमीन में धंस गया।
टोडरपुर गांव के लोगों के हलक को तर करने के लिए सरकारी प्रयास हुए और बजट के बाद नल को बोरिंग कर चालू किया गया तो राह चलते लोगों के हलक गर्मी में तर हो पाने का रास्ता मिला तो सभी सरकारी प्रयासों पर मुदित भाव में आ गए। समय के साथ लोगों को इंतजार था कि हैंडपंप के नीचे चबूतरा नियमानुसार बनेगा और यह व्यवस्थित भी हो जाएगा।
चबूतरा तो दूर हैंडपंप के बेस को भी मजबूत करने के लिए सीमेंट गारा तक मयस्स्र नहीं हुआ। अब हैंडपंप सप्ताह भर की बारिश के बाद जमीन में जा धंसा तो गांव के लोग भी सरकारी प्रयासों को कोसते नजर आ रहे हैं। सरकारी नल लगाने की मंशा तो बरसात में सूखी नजर आ रही थी तो वहीं नल धंसने के बाद अब पूरी तरह से निष्प्रयोज्य भाव में आ गया।
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पानी के नल के धंसने पर ग्रामीण संतोष सिंंह कहते हैं कि कौन कह रहा है कि वह धंस गया? वह तो पानी भरने के लिए नीचे जा रहा है। जब पानी भर जाएगा तब अपने आप भी वापस आ जाएगा। गांव के अन्य लोग भी इसी भाव में सरकारी कर्मचारियों की करतूतों पर तंज कस रहे हैं। जबकि गांव में जमीन धंसने की भी चर्चा से लोग नल के पास जाने से हिचक रहे हैं।
बताया गया कि टोडरपुर गांव में गुरुवार को सतीश कुमार सिंह के दरवाजे पर लगा हैंडपंप दो फीट नीचे खिसक कर जमीन में धंस गया जिससे गांव वाले सहमे हुए हैं। हैंडपंप धंसने की खबर लगते ही उसे देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ भी जुट गई। हैंडपंप का धसना चर्चा का विषय बना रहा। आशंका हैं कि बारिश के चलते बोरिंग की पाइप बैठ गई होगी, जबकि ग्रामीण दो साल से इसे पक्का ना करने को वजह बता रहे हैं।
