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    तंगहाली बनी ढाल, महाभारत से मिली प्रेरणा; छोटे से गांव से निकलकर तीरंदाजी में नेशनल लेवल पर चमकी यूपी की आयुषी

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 07:20 PM (IST)

    वाराणसी की आयुषी प्रजापति ने गरीबी और संघर्षों को पार कर तीरंदाजी में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। ...और पढ़ें

    आयुषी प्रजापति

    आयुषी प्रजापति

    HighLights

    1. आयुषी प्रजापति ने गरीबी के बावजूद तीरंदाजी में राष्ट्रीय पहचान बनाई।

    2. पिता के त्याग और कोच के मार्गदर्शन से हासिल की कई सफलताएं।

    3. राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन कर सोनभद्र के हॉस्टल में चयनित हुई।

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। अगर हौसलों में उड़ान हो, तो तंगहाली की बेड़ियां भी रास्ता नहीं रोक पाती। हरहुआ ब्लॉक के एक छोटे से गांव पुआरी खुर्द की रहने वाली आयुषी प्रजापति की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है। एक ओर मजदूरी और खेती-किसानी कर परिवार का पेट पालते पिता सुनील कुमार प्रजापति और दूसरी तरफ आर्थिक तंगी से घिरी जिंदगी में बेटी के लिए तीरंदाजी जैसे महंगे खेल का सपना देखना भी नामुमकिन सा लगता था।

    लेकिन आयुषी के इरादे तो कुछ और ही थे। उसने परिस्थितियों के सामने घुटने नहीं ठेके और सीमित संसाधनों में भी अभ्यास करती रही। नतीजा यह रहा कि वो अब लगातार अच्छा प्रदर्शन कर अपने परिवार, गांव का नाम रोशन कर रही है।

    आयुषी ने कक्षा 1 से 8 तक की पढ़ाई गांव के ही इंटर कॉलेज से की। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी आयुषी ने बचपन से ही माता-पिता के संघर्षों को देखा। वो घर और खेती के कामों में हाथ बंटाती, लेकिन उसके जेहन में महाभारत के अर्जुन की तरह लक्ष्य भेदने की ललक थी। उसकी इस खेल रुचि और छिपी हुई प्रतिभा को सबसे पहले कालेज की प्रबंधक शर्मिला प्रजापति ने पहचाना और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

    तीरंदाज दीपिका कुमारी को माना आइडल

    इसके बाद उसने स्कूल के ही मैदान में कोच हेमंत नारायण के मार्गदर्शन में कड़ा अभ्यास शुरू कर दिया। आयुषी बताती है कि महाभारत की कथा देख और सुनकर तीरंदाजी की ललक जगी। राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज दीपिका कुमारी को आदर्श मानकर अभ्यास शुरू कर दिया। उसने बताया कि तीरंदाजी महंगा खेल है, लेकिन पिता ने पेट काटकर और जरूरतों को समेट 10 हजार जुटाए और इंडियन राउंड धनुष, ड्रेस और जूते की व्यवस्था की।

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    इसके बाद अभ्यास में दिन-रात एक कर दिया। लगातार दो वर्ष की हाड़-तोड़ मेहनत रंग लाई। उसने सितंबर 2025 में आर्चरी स्कूल स्टेट में कांस्य पदक जीता। नवंबर-2025 में लखनऊ आर्चरी ओपन स्टेट में 15वां स्थान हासिल किया। फरवरी 2026 में मणिपुर में आर्चरी नेशनल में शानदार प्रदर्शन किया। आयुषी का चयन सत्र 2025-26 के लिए सोनभद्र के विशिष्ट स्टेडियम तियरा, राबर्ट्सगंज के तीरंदाजी हास्टल में हो गया।

    वो ओलंपियन सुमंगला शर्मा व एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट विश्वास शर्मा जैसे दिग्गजों की देखरेख में अपने हुनर को निखार रही है राष्ट्रीय स्तर पर पहुंची आयुषी दूसरों के लिए प्रेरणा बन गई है। छुट्टियों पर घर आने पर वो बच्चों को चुनौतियों से लड़ने और आगे बढ़ने की हिम्मत बंधा रही है।

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