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नेपाल आपदा का दूसरा पहलू: पहाड़ में त्रासदी, मैदान में रातभर गुलजार कैसिनो

By Jitendra PandeyEdited By: Vivek Shukla
Published: Sun, 06 Sep 2026 08:37 AM (IST)

नेपाल में पहाड़ों पर आपदा के बावजूद, सीमा से लगे मैदानी इलाकों में जीवन सामान्य है। भैरहवा के 22 कैसिनो ...और पढ़ें

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HighLights

  1. नेपाल के मैदानी इलाकों में कैसिनो में रौनक बरकरार।

  2. भैरहवा के 22 कैसिनो में भारतीय जुआरी रातभर सक्रिय।

  3. आपदा के बावजूद करोड़ों का जुआ कारोबार जारी है।

जितेंद्र पांडेय, सिद्धार्थनगर। नेपाल की आपदा से जुड़ी तस्वीरों में पहाड़ों की तबाही और बंद रास्ते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन यही पूरा नेपाल नहीं है। सीमा से लगे मैदानी इलाकों में जिंदगी सामान्य रफ्तार से चल रही है। भैरहवा से बुटवल तक बाजारों और पर्यटन गतिविधियों पर खास असर नहीं दिख रहा, बल्कि पहाड़ का संपर्क टूटने से मैदानी क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है।

रात होते ही 22 कैसिनो में रौनक लौट आती है और हजारों भारतीय रोज यहां पहुंचकर देर रात तक दांव लगाते हैं। भैरहवा से बुटवल तक करीब 22 कैसिनो संचालित हैं। इनमें अकेले भैरहवा में 18 हैं। करीब 15 वर्ष पहले शहर में सिर्फ एक कैसिनो था। कपिलवस्तु के चंद्रौटा में लगभग डेढ़ वर्ष पहले ग्रीन जैकपाट कैसिनो शुरू हुआ।

सीमा से नजदीकी के कारण भैरहवा भारतीय जुआरियों का प्रमुख ठिकाना बना हुआ है। आपदा से पहले यहां प्रतिदिन 20 से 22 करोड़ रुपये के जुए का अनुमान था। मौजूदा परिस्थितियों में भी कारोबार में खास गिरावट नहीं बताई जा रही है। भैरहवा में लाकोल, नयन्स, निर्माणा, मौर्या, रेडिसन और टाइगर समेत कई कैसिनो चल रहे हैं। कुछ में करीब 500 और अन्य में 200 से 300 लोगों के बैठने की क्षमता है।

रूलेट, ब्लैक जैक और स्लाट मशीन पर भारतीय रुपये में दांव लगाया जाता है। रूलेट में 10 रुपये से 10 हजार रुपये तक की रकम लगती है। रातभर खेलने के बाद बड़ी संख्या में भारतीय सुबह वापस लौटते हैं। कैसिनो में पहले नकदी जमा कर गोटियां ली जाती हैं। भारतीयों के लिए बड़ी मात्रा में नकदी नेपाल ले जाना संभव नहीं होने के कारण सामान्यतः 10 से 15 हजार रुपये साथ रखने की बात सामने आती है।

इसके बाद ब्रोकर के माध्यम से रकम उपलब्ध कराई जाती है और करीब 10 प्रतिशत कमीशन पहले काटे जाने की बात कही जाती है। रकम आनलाइन खातों में स्थानांतरित किए जाने की जानकारी भी सामने आती रही है। अनुमान के अनुसार रोज चार से पांच हजार भारतीय भैरहवा के कैसिनो पहुंचते हैं। इनमें सिद्धार्थनगर से करीब 400 से 500 और गोरखपुर से 1000 से 1200 लोगों के पहुंचने की चर्चा है।

महराजगंज, बलरामपुर, बस्ती, संतकबीर नगर, कुशीनगर और देवरिया से भी बड़ी संख्या में लोग जाते हैं। जुए का कारोबार केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। स्थानीय स्तर पर कर्ज लेने, जमीन-कारोबार और पारिवारिक बचत गंवाने के मामले सामने आते रहे हैं। आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या जैसी घटनाएं भी चिंता बढ़ाती रही हैं।

नेपाली नागरिकों की नो-एंट्री
कैसिनो में नेपाली नागरिकों का प्रवेश प्रतिबंधित है और विदेशी ग्राहकों को ही अनुमति मिलती है। भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। सोनौली सीमा के पास कैसिनो की गाड़ियां खड़ी रहती हैं। भारतीय अपने वाहन सीमा तक लाते हैं और नेपाल पहुंचने के बाद कैसिनो की गाड़ियों से संबंधित प्रतिष्ठान तक जाते हैं।

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सीमा क्षेत्र में ब्रोकर भी ग्राहकों को कैसिनो तक पहुंचाने में सक्रिय बताए जाते हैं। पांच से 10 लाख रुपये तक दांव लगाने वाले बड़े ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए आने-जाने का खर्च, मुफ्त शराब, डिनर और डांस जैसी सुविधाएं देने की बात सामने आती रही है। प्रवेश के समय पहचानपत्र की प्रति लिए जाने की जानकारी भी है।

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