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    साइकिल चोरी के शक में मर्डर: 17 साल बाद 3 भाइयों को उम्रकैद, लापरवाही पर पुलिस अफसर पर कार्रवाई का आदेश

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 11:34 PM (IST)

    शाहजहांपुर में साइकिल चोरी के शक में हुए पंकज हत्याकांड में 17 साल बाद तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने विवेचना में लापरवाही बरतने ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. शाहजहांपुर में एक आरोपित को बचाने में विवेचक के विरुद्ध कार्रवाई का आदेश

    2. युवक की घायल पत्नी व बहन को नहीं बनाया था गवाह, बाद में कोर्ट में पेश हुईं

    जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। साइकिल चोरी के शक में पंकज के हत्यारे हरिशचंद्र, संगम व मातादीन को उम्रकैद की सजा दी गई। इस प्रकरण के विवेचक पुवायां थाने के तत्कालीन एसएसआइ जयनरायन ने एक आरोपित को क्लीनचिट दे दी थी। पंकज की घायल पत्नी व बहन को गवाह नहीं बनाया, जबकि वे प्रत्यक्षदर्शी थीं। सोमवार को अपर जिला जज नेहा आनंद ने निर्णय के दौरान विवेचक की भूमिका पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई के आदेश दिए।

    जारमानो गांव में वर्ष 2007 में मातादीन की साइकिल चोरी हो गई थी। उसे शक था कि पंकज व रामनरेश ने चोरी कराई है। उसने दो अप्रैल 2007 को रास्ते से गुजर रहे पंकज व रामनरेश को गालियां दीं। इसका विरोध करने पर मातादीन, उसके भाई हरिशचंद्र, संगम व गांव के राजकुमार ने लाठियों से पीटा।

    इसमें रामनरेश, पंकज, बीच-बचाव करने पहुंचीं उनकी पत्नी मैना, बहन घायल हुई थीं। भाई रमेश चंद्र की तहरीर पर मारपीट की रिपोर्ट लिखी गई। बाद में अस्पताल में पंकज की मौत होने पर गैरइरादतन हत्या की धारा लगाई गई।

    मुकदमा लिखाने वाले भाई रमेश चंद्र ने बताया कि पुवायां थाने के तत्कालीन एसएसआइ जयनरायन मिश्रा ने राजकुमार को क्लीनचिट देकर नाम हटा दिया। हरिशचंद्र, संगम व मातादीन के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया था। शासकीय अधिवक्ता संदीप शर्मा ने बताया कि राजकुमार की संलिप्तता के बावजूद उसका नाम विवेचना में हटाया गया था।

    मुकदमे के दौरान वादी भी प्रभावी पैरवी नहीं कर रहा था। घटनास्थल पर मौजूद पंकज की पत्नी व बहन को गवाह नहीं बनाया गया। इस पर आपत्ति करते हुए पंकज की पत्नी व बहन को बयान के लिए न्यायालय में बुलाए जाने के लिए प्रार्थना दिया तो विरोधी पक्ष ने इसके विरुद्ध हाईकोर्ट में अपील की। वहां से उन लोगों की अपील खारिज होने के बाद दोनों महिलाओं की गवाही हुई।

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    पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण सिर में चोट लगना बताया गया। साक्ष्य, गवाहों के बयान के आधार पर अपर जिला जज नेहा आनंद ने हरिशचंद्र, मातादीन व संगम को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

    शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि जज ने आरोपित का नाम निकालने व विवेचना में लापरवाही को लेकर विवेचक के विरुद्ध कार्रवाई के लिए एसपी, डीपीपी व प्रमुख सचिव गृह को पत्र भेजने के आदेश दिए हैं।

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