'संविधान में कहां लिखा है मालिक-नौकर?' आयोग के तीखे सवाल पर संभल सांसद बर्क की सफाई- 'भड़काना नहीं, समझाना था मकसद'
संभल हिंसा की जांच रिपोर्ट में सांसद जियाउर्रहमान बर्क की गवाही सामने आई है, जिसमें आयोग ने उनके 'मालिक-नौकर-गुलाम' वाले बयान पर तीखे सवाल पूछे। सांसद ...और पढ़ें

संभल में हुई हिंसा में जलतीं गाड़ियां। जागरण आर्काइव
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संभल हिंसा की जांच रिपोर्ट में सामने आई गवाही, आयोग ने पूछे थे तीखे सवाल
संवाद सहयोगी, बहजोई (संभल)। संभल हिंसा की जांच कर रहे न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में एक और तस्वीर सामने आई है। जिसके आयोग के समक्ष संभल सांसद जियाउर्रहमान बर्क की दर्ज गवाही में हुए सवाल-जवाब हुए थे। आयोग ने 19 और 22 नवंबर 2024 को दिए सांसद के बयानों को आधार बनाकर उनकी मंशा और प्रभाव को लेकर कई सवाल किए थे।
खास तौर पर पुलिस, प्रशासन या सरकार से नहीं डरने और खुद को देश का मालिक बताते हुए नौकर या गुलाम नहीं होने संबंधी बयान पर आयोग ने पूछा था कि पुलिस-प्रशासन की किन कार्रवाइयों ने उन्हें ऐसा कहने के लिए प्रेरित किया और संविधान के किस प्रावधान में मालिक, नौकर और गुलाम जैसे शब्दों का उल्लेख है
आयोग ने यह भी पूछा था कि सांसद और कानून स्नातक होने के नाते सार्वजनिक रूप से इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल बड़े विरोध को भड़काने वाला नहीं था? सांसद ने जवाब दिया था कि उनका संबोधन जनता के लिए नहीं बल्कि मीडिया के सवालों के जवाब में था।
जुमे की नमाज के लिए आने वाले लोगों को मस्जिद से 150-200 मीटर पहले बैरिकेड पर रोका गया था और उनके साथ अभद्रता की गई थी। उन्होंने लोगों को शांत कराने और मामला वरिष्ठ अधिकारियों व कोर्ट के समक्ष उठाने की बात कही थी।
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मालिक शब्द की व्याख्या करते हुए कहा था कि आजादी और संविधान बनने के बाद देशवासी ब्रिटिश शासन या किसी राजा-सम्राट के गुलाम नहीं थे, बल्कि गर्व से स्वयं को देश का मालिक कहते थे। उन्होंने अपने बयान को उत्तेजक मानने से भी इन्कार किया था और कहा था कि उनका उद्देश्य लोगों को भड़काना नहीं, बल्कि समझाना था कि जामा मस्जिद का मामला कानूनी और संवैधानिक तरीके से लड़ा जाएगा।
गवाही में बोले थे सांसद -19 नवंबर को अकेले मस्जिद में दाखिल हुए थे
सांसद ने आयोग को बताया था कि 19 नवंबर को सर्वे की जानकारी मिलने के बाद वह जामा मस्जिद पहुंचे थे। उनके साथ ड्राइवर, गनर और फरीद थे, जिन्हें करीब 150 मीटर पहले पुलिस ने बैरिकेड पर रोक दिया था। वह अकेले मस्जिद में गए थे। अंदर डीएम, एसपी, सर्वे समिति और प्रबंधन समिति के सदस्य मौजूद थे। उन्होंने कोर्ट के आदेश की प्रति मांगी थी, जो उस समय उनके पास नहीं थी।
सांसद ने बाइट पहले नहीं देखी थी, वीडियो दिखाने पर मानी थी
19 नवंबर को मीडिया को दिए बयान के बारे में सांसद ने पहले कहा था कि उन्हें याद नहीं था कि उन्होंने बाइट दी थी। आयोग द्वारा वीडियो क्लिप दिखाए जाने के बाद उन्होंने स्वीकार किया था कि उन्होंने मीडिया से बातचीत की थी।
उन्होंने कहा था कि बाइट संपादित थी और उसमें कोर्ट के आदेश का सम्मान करने तथा कानूनी लड़ाई लड़ने की बात भी कही गई थी। उन्होंने अनुचित शब्दों के इस्तेमाल से इन्कार किया था।
जफर की सूचना के समय बेंगलुरु में थे सांसद
गवाही में सांसद ने बताया था कि 24 नवंबर के सर्वे की जानकारी उन्हें 23 नवंबर की रात जामा मस्जिद प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जफर ने दी थी। उस समय वह बेंगलुरु में आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की पहले से तय बैठक में शामिल होने गए थे। उनका पीआरओ अब्दुल रहमान उनके साथ नहीं गया था और दिल्ली में था। जफर ने उन्हें दो बार फोन किया था।