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    संभल हिंसा: जामा मस्जिद के जिम्मेदारों के बयानों में विरोधाभास, न्यायिक आयोग का साजिश की ओर इशारा

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 11:59 PM (IST)

    न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में बहजोई जामा मस्जिद प्रबंधन समिति के गवाहों के बयानों में विरोधाभास सामने आया है, जिससे 24 नवंबर 2024 की घटना को लेकर अलग-अल ...और पढ़ें

    जामा मस्जिद के जिम्मेदारों के बयानों में विरोधाभास।

    जामा मस्जिद के जिम्मेदारों के बयानों में विरोधाभास।

    HighLights

    1. जामा मस्जिद गवाहों के बयानों में विरोधाभास मिला।

    2. वजू टैंक का पानी निकालने से भ्रम फैला।

    3. न्यायिक आयोग ने घटना में साजिश का संकेत दिया।

    संवाद सहयोगी, बहजोई। न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में जामा मस्जिद प्रबंधन समिति से जुड़े गवाहों की गवाही ने 24 नवंबर 2024 की घटना को लेकर एक जैसी नहीं बल्कि अलग-अलग तस्वीर सामने रखी थी। समिति से जुड़े लोगों ने सर्वे, प्रशासन की कार्रवाई, बाहर जुटी भीड़ और हिंसा के बारे में अपने-अपने अनुभव आयोग के सामने रखे थे।

    गवाहियों में एक महत्वपूर्ण समानता वजू टैंक का पानी निकाले जाने को लेकर थी। पानी तेजी से बहने से बाहर मौजूद लोगों में भ्रम पैदा होने की बात कई गवाहों ने कही थी।

    इसके बाद की स्थिति को लेकर हालांकि बयान अलग रहे। समिति के सदस्य मशहूद अली फारूकी ने भारी पुलिस बल की तैनाती को भीड़ को मस्जिद में प्रवेश करने से रोकने वाला बताया।

    उन्होंने कहा कि इससे संभावित बड़ी हिंसा टल गई। उनके अनुसार पुलिस और प्रशासन ने भीड़ से शांति बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने यह भी बताया कि एसडीएम के निर्देश पर वजू टैंक का पानी निकाला गया और इसके बाद बाहर मौजूद लोगों में भ्रम फैला। भीड़ ने नारेबाजी, पत्थरबाजी और आगजनी की।

    समिति के सदस्य लद्दन खान की गवाही भी प्रशासन के सहयोग वाली तस्वीर पेश करती है। उन्होंने कहा कि 19 नवंबर को सर्वे टीम ने करीब ढाई घंटे काम किया और समिति ने पूरा सहयोग किया था।

    24 नवंबर को भी सर्वे टीम के साथ समिति के सदस्य मौजूद रहे। उनके अनुसार टैंक का पानी एसडीएम के निर्देश पर माप के लिए निकाला गया। पानी के तेज बहाव से बाहर भ्रम की स्थिति बनी।

    उन्होंने कहा कि समिति ने लाउडस्पीकर से लगातार शांति की अपील की। इसके विपरीत समिति अध्यक्ष जफर अली ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए, लेकिन पूछताछ में सीओ के दुर्व्यवहार और लाठीचार्ज के आदेश वाली बात खुद देखने के बजाय लोगों से सुनकर शपथ-पत्र में लिखने की बात स्वीकार की।

    इस तरह फारूकी और लद्दन की गवाही में प्रशासनिक कार्रवाई और समिति के सहयोग की तस्वीर दिखी, जबकि जफर अली की गवाही में पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठे।

    कासिम जमाल: 19 नवंबर को वादी के अधिवक्ता से हुई थी तीखी बहस

    कासिम जमाल ने आयोग को बताया था कि 19 नवंबर को दोपहर 3:30-3:45 बजे कोर्ट कार्यालय में एक फाइल से आदेश पढ़ने की कोशिश के दौरान वादी के अधिवक्ता से उनकी तीखी बहस हुई थी। उन्होंने कोर्ट में वकालतनामा दाखिल नहीं किया था और समिति अध्यक्ष के आग्रह पर मौजूद थे। 24 नवंबर को वह सुबह 7:25 बजे मस्जिद पहुंचे थे। उन्होंने धुआं, गोलीबारी की आवाजें सुनी थीं और बाद में पत्थरबाजी व वाहनों में आगजनी की जानकारी मिली थी।

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    मशहूद फारूकी: 22 नवंबर को करीब 2,000 नमाजी होने की बात

    मशहूद अली फारूकी ने आयोग को बताया था कि सामान्य जुमे की नमाज में करीब एक हजार लोग आते थे, लेकिन 22 नवंबर को करीब दो हजार लोग मौजूद थे। उन्हें इतनी भीड़ अचानक कैसे जुटी, इसकी जानकारी नहीं थी। उन्होंने सांसद के मीडिया संबोधन के दौरान मौजूदगी की बात भी कही थी। आयोग के सामने उन्होंने यह माना था कि मस्जिद की सीढ़ियों पर दिया गया बयान या प्रेस वार्ता अनुचित था। 24 नवंबर को उन्होंने भारी भीड़ और नारेबाजी भी देखी थी।

    जामा मस्जिद अध्यक्ष ने कहा- पानी निकलने से भीड़ में फैला भ्रम, पुलिस की गोलीबारी देखी

    जफर अली ने बताया था कि 23 नवंबर की रात उन्होंने सांसद बर्क से दो बार बात की थी। पहली बार पीआरओ के मोबाइल पर और दूसरी बार सांसद से। उन्होंने बताया था कि अगले दिन फिर सर्वे होना है और पूछा था कि एक बार सर्वे होने के बाद दोबारा क्यों हो रहा है।

    उन्होंने सांसद से डीएम और एसपी से सर्वे रोकने को कहने का अनुरोध किया था। सांसद ने इसे मुश्किल बताया था। जफर ने जनता को सर्वे की सूचना देने से इन्कार किया था। जफर अली ने खुद को घटना का प्रत्यक्षदर्शी बताया।

    उन्होंने कहा कि सुबह भारी पुलिस बल तैनात था। इससे आसपास लोग जुटने लगे। सर्वेक्षण शांतिपूर्वक चल रहा था। बाद में एसडीएम के निर्देश पर वजू टैंक का पानी निकाला गया।

    पानी तेजी से बहने पर भीड़ में भ्रम फैला कि मस्जिद में खुदाई की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि भीड़ ने सीओ से स्पष्टीकरण मांगा और सीओ ने कथित तौर पर गाली देकर लाठीचार्ज का आदेश दिया।

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