संभल विवाद: 1874 में पहली बार सिविल कोर्ट में दायर हुआ था वाद, तत्कालीन ASI अफसर कार्लाइल ने दिया था यह निष्कर्ष
संभल की जामा मस्जिद को लेकर मंदिर होने का दावा 1874 में भी न्यायालय पहुंचा था, जहां तत्कालीन एएसआई अधिकारी कार्लाइल ने इसे मंदिर से मस्जिद में परिवर्त ...और पढ़ें

हरिहर मंदिर और जामा मस्जिद
HighLights
तत्कालीन एएसआइ अधिकारी एसीएल कार्लाइल ने किया था निरीक्षण
संवाद सहयोगी, संभल। संभल की जामा मस्जिद को लेकर मंदिर होने का दावा करीब 150 वर्ष पहले अंग्रेजी हुकूमत में भी न्यायालय तक पहुंच चुका था। वर्ष 1874 में अंग्रेजी हुकूमत में हिंदू पक्ष के छेदा सिंह ने सिविल न्यायालय में जामा मस्जिद में मंदिर होने का दावा करते हुए वाद दायर किया था। मामले की सुनवाई के दौरान तत्कालीन एएसआइ अधिकारी एसीएल कार्लाइल ने जामा मस्जिद का निरीक्षण किया था।
न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में कार्लाइल के निरीक्षण और उस समय सामने आए तथ्यों का भी उल्लेख किया गया है। न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में बताया गया है कि 1874 में जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष की ओर से सिविल न्यायालय में वाद दायर किया गया था।
न्यायालय में मामला चलने के दौरान तत्कालीन एएसआइ अधिकारी एसीएल कार्लाइल ने जामा मस्जिद का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद उन्होंने मस्जिद के गुंबद की कारीगरी को हिंदू शैली का बताया था, जबकि पंखों के निर्माण में छोटी मुस्लिम ईंटों के इस्तेमाल का उल्लेख किया था।
कार्लाइल ने निष्कर्ष निकाला था कि मंदिर को मस्जिद में परिवर्तित किया गया है। रिपोर्ट में कार्लाइल के निरीक्षण से संबंधित स्थापत्य विवरण भी दर्ज हैं। उनके अनुसार जामा मस्जिद का पूरा हिस्सा प्लास्टर से ढका हुआ था। इस कारण निर्माण में इस्तेमाल सामग्री का वास्तविक स्वरूप पता लगाना कठिन था।
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पंखों को एक पार्श्व स्तंभों की पंक्ति के माध्यम से दो गलियारों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक गलियारे में आंगन की ओर तीन मेहराबदार खुलाव थे। दोनों ओर पत्थर की सीढ़ियां थीं, जो मस्जिद की छत तक पहुंचती थीं। छत से शहर और आसपास के क्षेत्र का दृश्य दिखाई देता था।
कार्लाइल हिंदू पक्ष की इस दलील से प्रभावित थे कि मस्जिद की दीवारों पर मौजूद पुराने शिलालेखों के साथ छेड़छाड़ की गई थी। हालांकि न्यायालय में हिंदू पक्ष का यह दावा निश्चित रूप से स्वीकार नहीं किया गया।
बाद में जनरल कनिंग ने भी मस्जिद की दीवारों पर मौजूद शिलालेखों को वास्तविक न मानने संबंधी सुझाव को खारिज कर दिया था। करीब 150 वर्ष बाद जामा मस्जिद को लेकर फिर न्यायालय में वाद पहुंचा।
19 नवंबर 2024 को चंदौसी स्थित सिविल जज (सीनियर डिवीजन) न्यायालय में गाजियाबाद निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन, नोएडा निवासी पार्थ यादव, कैलादेवी के महंत ऋषिराज गिरि समेत आठ वादकारियों ने वाद दायर किया था।
इसमें जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताते हुए पूजा-अर्चना की अनुमति मांगी गई थी। न्यायालय के आदेश पर जामा मस्जिद का सर्वे कराया गया था। सर्वे के दौरान 24 नवंबर 2024 को हिंसा भड़क गई थी।
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