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    रायबरेली में आवारा कुत्ते के काटने से बुजुर्ग की मौत, चार दिन बाद ली थी एंटी-रैबीज की पहली डोज

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 04:09 AM (IST)

    रायबरेली में आवारा कुत्ते के काटने के बाद एंटी-रैबीज की पहली डोज में देरी के कारण एक बुजुर्ग की मौत हो गई। झाड़-फूंक के चक्कर में चार दिन बाद टीका लगव ...और पढ़ें

    आवारा कुत्ते के काटने से बुजुर्ग की मौत।

    आवारा कुत्ते के काटने से बुजुर्ग की मौत।

    HighLights

    1. मोन गांव में कुत्ते के काटने से बुजुर्ग की रैबीज से मौत।

    2. झाड़-फूंक के कारण एंटी-रैबीज की पहली डोज में देरी हुई।

    3. डॉक्टरों ने तुरंत टीका और झाड़-फूंक से बचने की सलाह दी।

    संवाद सूत्र, महराजगंज (रायबरेली)। आवारा कुत्ते के काटने के बाद एंटी रैबीज लगवाने में विलंब करना मोन गांव के बुजुर्ग को जानलेवा बन गया। उन्होंने पहली डोज चार दिनों बाद लगवाई थी। इस दौरान झाड़-फूंक के चक्कर में लगे रहे। घटना के 26 दिनों बाद शनिवार को उन्हें हवा-पानी से डर लगने लगा।

    घर वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। इस कुत्ते ने उसी दिन गांव में कई ग्रामीणों को काट कर घायल कर दिया था, गाय को भी जख्मी किया था। बाद में गाय की भी मौत हो गई थी। घटना के दूसरे दिन गांव वालों ने कुत्ते को घेर कर मार डाला था।

    13 जुलाई की रात मोन गांव में एक आवारा कुत्ता घुस आया था। रास्ते में जो भी मिला उस पर हमलावर होता रहा। कुत्ते ने बाबा ओरिदास मंदिर के पास सो रहे सगे भाई कमलेश और रामाशंकर के हाथों पर जख्म कर दिया था।

    इसके बाद नलकूप पर सो रहे विजय प्रताप सिंह के सीने में काट लिया। उसका आतंक यहीं नहीं थमा, उसने गांव के शिवप्रसाद, चौहान पासी, राजेश, शिवम और रीता समेत करीब 12 लोगों को घायल कर दिया। कुत्ते ने एक गाय को भी काटा था, कुछ दिनों बाद गाय कुत्ते जैसी हरकत करने लगी और उसकी मौत हो गई।

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    घटना के दूसरे दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और घायलों को एंटी रैबीज का पहला इंजेक्शन लगाया। आगे की डोज के लिए घायलों को सीएचसी बुलाया गया था। चौहान पासी ने झाड़-फूंक के चक्कर में पहली डोज नहीं लगवाई। वह घटना के चार दिनों बाद 17 जुलाई को सीएचसी में पहुंचे और पहली डोज लगवाई।

    करीब 25 दिनों बाद शुक्रवार को उनकी तबीयत बिगड़ गई। बुजुर्ग को पानी और हवा से डर लगने लगा। घर वाले उन्हें सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे जहां शनिवार सुबह उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। बुजुर्ग की मौत के बाद गांव में उस दिन की घटना में घायल हुए लोगों के परिवारीजन में भय व्याप्त है।

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    इसी तहसील के मझिगवां की ग्राम प्रधान रेखा को सात मार्च को कुत्ते ने काट लिया था। उन्होंने भी झाड़-फूंक के चक्कर में पड़कर पहली डोज करीब 10 दिन बाद लगवाई थी। हालत बिगड़ने पर उन्हें घर वाले लखनऊ में इलाज कराने ले गए थे जहां एक अप्रैल को उनकी मौत हो गई थी।

    चिकित्सक की सलाह

    सीएचसी अधीक्षक गणनायक पांडेय ने बताया कि कुत्ता काटते ही साबुन-पानी से 15 मिनट तक घाव धोएं। 24 घंटे के अंदर पहला एंटी रैबीज इंजेक्शन अवश्य लगवाएं। पांच डोज का कोर्स पूरा करें। झाड़-फूंक न कराएं। सीधे डॉक्टर के पास जाएं। मोन गांव के सभी घायलों को समय से एंटी रैबीज की डोज दी जा रही है। बुजुर्ग ने पहली डोज लगवाने में देरी की थी, इसी कारण उनकी हालत बिगड़ी।

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