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    Indian Railways : अब रेल फाटक पर नहीं लगेगा झटका, समपार क्रासिंग पर बिछेगी रबर युक्त सतह; आराम से गुजरेंगी ट्रेनें

    By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Fri, 24 Jul 2026 02:40 PM (IST)

    भारतीय रेलवे प्रयागराज मंडल में समपार फाटकों पर रबर युक्त सतह लगाएगा, जिससे वाहन चालकों को झटकों और गड्ढों से राहत मिलेगी। यह तकनीक यात्रा को सुगम, सु ...और पढ़ें

    रेलवे फाटक। जागरण आर्काइव

    रेलवे फाटक। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. नहीं होंगे रेल फाटक पर पटरी के बगल गड्ढे

    2. प्रयागराज मंडल में होगी तकनीक की शुरुआत

    अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। भारतीय रेलवे ने रेल और सड़क यातायात को अधिक सुरक्षित, सुगम और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अब रेलवे समपार फाटकों (लेवल क्रॉसिंग) से गुजरते समय वाहन चालकों को लगने वाले जोरदार झटकों, गड्ढों और बार-बार लगने वाले ट्रैफिक जाम से स्थायी राहत मिलने जा रही है।

    रेल पटरियों की सुरक्षा और मजबूती

    रेलवे प्रशासन ने क्षेत्र के आठ प्रमुख समपार फाटकों पर अत्याधुनिक रबर युक्त सतह (रबराइज्ड सर्फेसिंग) के उन्नयन का कार्य कराने का निर्णय लिया है। इस नई तकनीक के लागू होने से न केवल वाहनों की आवाजाही बिना किसी बाधा के हो सकेगी, बल्कि रेल पटरियों की सुरक्षा और मजबूती में भी इजाफा होगा।

    भारी वाहनों से पटरियों के किनारे गड्ढे बन जाते हैं 

    आमतौर पर रेलवे फाटकों पर पटरियों के बीच और आसपास के हिस्से में कंक्रीट, तारकोल या गिट्टी (बैलास्ट) का इस्तेमाल किया जाता है। लगातार भारी वाहनों के गुजरने से यह कंक्रीट टूट जाती है और गिट्टियां बिखर जाती हैं, जिससे पटरियों के किनारे गहरे गड्ढे बन जाते हैं।

    क्या है रबर युक्त सतह, कैसे होती है फिटिंग?

    रबर युक्त सतह एक अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक है। इसमें उच्च घनत्व वाले, भारी वजन सहने में सक्षम और लचीले रबर के बने विशेष प्रीफैब्रिकेटेड (पूर्वनिर्मित) ब्लॉकों का उपयोग किया जाता है। इन रबर पैनलों को रेलवे लाइन के दोनों तरफ और पटरियों के बीचो-बीच बहुत ही बारीकी से फिट किया जाता है। इन्हें पटरियों और स्लीपरों के साथ एक विशेष लॉकिंग सिस्टम के जरिए इस तरह कस दिया जाता है कि सड़क और रेल लाइन की ऊंचाई बिल्कुल एक समान (समतल) हो जाती है। इसके बाद सड़क और पटरी का जोड़ पूरी तरह से सील हो जाता है।

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    कैसे काम करती है यह तकनीक, क्या हैं फायदे?

    इस रबर युक्त सतह का मुख्य कार्य समपार फाटकों पर सड़क और रेल लाइन के जंक्शन को पूरी तरह से सपाट और झटकारहित बनाना है। जब भी कोई कार, बस, दोपहिया वाहन या भारी ट्रक फाटक से गुजरता है, तो रबर का लचीलापन वाहन के वजन और झटके को सोख (एब्जॉर्ब) लेता है।

    झटकारहित सफर और वाहनों की सुरक्षा

    पारंपरिक फाटकों पर बने गड्ढों के कारण अक्सर वाहनों के सस्पेंशन, टायर और चेसिस को भारी नुकसान पहुंचता था। नई रबर सतह बनने से गाड़ियां बिना किसी झटके के बिल्कुल मक्खन की तरह आराम से गुजर सकेंगी।

    जाम से मुक्ति

    गड्ढों और ऊबड़-खाबड़ रास्ते के कारण चालकों को फाटक पार करते समय गाड़ियों की रफ्तार बेहद धीमी करनी पड़ती थी, जिससे फाटक खुलते ही दोनों तरफ लंबा जाम लग जाता था। अब समतल सतह होने से वाहन सामान्य गति से आसानी से निकल सकेंगे, जिससे जाम की समस्या खत्म होगी।

    दुर्घटनाओं पर लगाम

    कई बार फाटकों के गड्ढों में दोपहिया वाहन अनियंत्रित होकर गिर जाते थे या भारी वाहन फंस जाते थे, जिससे हादसे का खतरा बना रहता था। रबर सतह से यह जोखिम पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

    जलजमाव और जंग से सुरक्षा

    बारिश के मौसम में पटरियों के बीच पानी जमा होने से पटरियों में जंग लगने और नीचे की मिट्टी धंसने की शिकायत रहती थी। नई तकनीक के रबर ब्लॉक पूरी तरह वॉटरप्रूफ हैं, जिससे पानी पटरियों के नीचे नहीं जाएगा और रेल ट्रैक की उम्र बढ़ेगी।

    कम रखरखाव और लंबी टिकाऊ क्षमता

    कंक्रीट और तारकोल की तुलना में रबर ब्लॉक अत्यधिक टिकाऊ होते हैं। यह भारी से भारी लोड सह सकते हैं और सालों-साल खराब नहीं होते। इससे रेलवे को बार-बार मरम्मत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और रखरखाव का खर्च भी कम होगा। रेलवे का यह प्रयास न केवल यात्रियों के समय और ईंधन की बचत करेगा, बल्कि सड़क और रेल दोनों तरह के सफर को एक नया और सुरक्षित आयाम देगा। जल्द ही इन आठों समपार फाटकों पर काम पूरा कर इसे जनता के लिए चालू कर दिया जाएगा।

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