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'शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का अधिकार, यह शासन के लिए सेफ्टी वाल्व की तरह', नोएडा हिंसा मामले में HC की टिप्पणी

Published: Tue, 08 Sep 2026 11:46 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का मूल अधिकार और 'सेफ्टी वाल्व' है, जिसे मनमाने ढंग से दबाया नहीं जा सकता।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

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विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध नागरिकों का मूल अधिकार है। यह शासन के लिए ‘सेफ्टी वाल्व’ की तरह काम करता है, जिसे मनमाने ढंग से दबाया नहीं जा सकता।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने यह टिप्पणी दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी की बंदी प्रत्यक्षीकरण स्वीकार करते हुए की है। कोर्ट ने नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों के वेतन वृद्धि आंदोलन से जुड़े मामले में छात्रा पर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून भी रद कर दिया है। कोर्ट ने पुलिस की कहानी में बड़ा विरोधाभास पाया।

11 अप्रैल को आकृति को लिया गया हिरासत में

आकृति चौधरी को पुलिस ने 11 अप्रैल 2026 को ही हिरासत में लिया था, जबकि नोएडा में हिंसा और आगजनी की घटना 13 अप्रैल 2026 को हुई। पीठ ने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति पहले से हिरासत में है, वह बाद की हिंसा के लिए जिम्मेदार कैसे हो सकता है? पुलिस गंभीर आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य या वीडियो नहीं पेश कर सकी।

बीएनएसएस की धारा 130 के तहत दिया गया नोटिस भी गिरफ्तारी के बाद तैयार किया गया औपचारिक दस्तावेज निकला। कोर्ट ने जिलाधिकारी, गौतमबुद्ध नगर द्वारा एनएसए लगाने को अत्यंत क्रूर और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया।

कोर्ट ने की ये टिप्पणी

कहा कि कड़े निवारक कानूनों का इस्तेमाल सामान्य जमानत रोकने के लिए नहीं किया जा सकता। बिना पुख्ता सबूत के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला हुआ तो अदालतें मूकदर्शक नहीं रहेंगी।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को याची को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि यह राशि जनता के खजाने से नहीं जाएगी। यह राशि जिलाधिकारी और शुरुआती रिपोर्ट तैयार करने वाले थाना प्रभारी सहित जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के वेतन से वसूली जाएगी।

कोर्ट ने सभी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी सख्त संदेश दिया। कोर्ट ने दोहराया कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) और 19(1)(बी) के तहत बिना हथियार शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होना और विरोध दर्ज कराना मौलिक अधिकार है।

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