'वैज्ञानिक जांच और निजता के अधिकार के बीच संतुलन जरूरी', सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तकनीकी प्रगति ने आपराधिक जांच को चुनौतीपूर्ण बना दिया है, जहां एजेंसियों को वैज्ञानिक जांच और निजता के अधिकार के बीच संतुलन बनाना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों को लेकर की टिप्पणी। (फाइल फोटो।)
HighLights
तकनीकी प्रगति से आपराधिक जांच हुई चुनौतीपूर्ण।
वैज्ञानिक जांच और निजता में संतुलन आवश्यक।
गाजियाबाद पुलिस पर डिजिटल फुटप्रिंट्स मांगने का आरोप।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि टेक्नोलॉजी में तरक्की की वजह से आपराधिक जांच बहुत मुश्किल और जांच एजेंसियों के लिए एक चुनौती बन गई है।
कोर्ट ने कहा कि एक तरफ अगर एजेंसियां वैज्ञानिक तरीके से जांच नहीं करती हैं तो उन्हें कोर्ट और पीड़ित की फटकार सुननी पड़ती है और दूसरी तरफ अगर वे ऐसा करती हैं तो उन पर प्राइवेसी के उल्लंघन का आरोप लगता है।
क्या है मामला?
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने एक अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा, "इसके बीच संतुलन बनाने की जरूरत है।"
याचिकाकर्ता ने गाजियाबाद पुलिस पर आरोप लगाया है कि पुलिस ने रोड रेज के एक कथित मामले में एफआईआर दर्ज करने का बहाना बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से 1 जून से उनके डिजिटल फुटप्रिंट्स मांगे हैं, ताकि उनके सोर्स का पता लगाया जा सके।
