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मानिकपुर-इरादतगंज तीसरी रेल लाइन से मुंबई रूट पर ट्रेनों की लेटलतीफी होगी खत्म, 37 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण तय

By Amarish Kumar Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Mon, 07 Sep 2026 12:49 PM (IST)

प्रयागराज समेत पूर्वांचल से मुंबई व दक्षिण भारत जाने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी, क्योंकि मानिकपुर-इरादतगंज तीसरी रेल लाइन के ...और पढ़ें

मुंबई रूट की सबसे बड़ी अड़चन अब दूर होगी, जिससे ट्रेनों की लेटलतीफी की समस्या अब नहीं होगी।

मुंबई रूट की सबसे बड़ी अड़चन अब दूर होगी, जिससे ट्रेनों की लेटलतीफी की समस्या अब नहीं होगी।

HighLights

  1. इस रूट की सबसे बड़ी अड़चन होगी दूर, भूमि अधिग्रहण तय, केंद्र ने जारी किया गजट

  2. प्रयागराज, पूर्वांचल और बिहार से मुंबई व दक्षिण भारत जाने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। प्रयागराज समेत पूर्वांचल और बिहार से मुंबई व दक्षिण भारत की ओर रेल से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। इस पूरे रूट की सबसे बड़ी अड़चन (बॉटलनेक) को हमेशा के लिए दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उत्तर मध्य रेलवे (निर्माण विभाग) की अति-महत्वपूर्ण परियोजना ‘मानिकपुर-इरादतगंज तीसरी लाइन’ के निर्माण के लिए प्रयागराज जिले में जमीन अधिग्रहण की अंतिम प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।

केंद्र सरकार ने भूमि अधिग्रहण किया

केंद्र सरकार ने रेलवे (संशोधन) अधिनियम, 2008 की धारा 20E के तहत अंतिम अधिसूचना भारत के आधिकारिक राजपत्र (गजट) में प्रकाशित कर दी है। इसके साथ ही चिन्हित की गई कुल 3,66,877 वर्ग मीटर (करीब 36.68 हेक्टेयर) निजी कृषि भूमि सभी प्रकार के कानूनी बंधनों और भार से मुक्त होकर सीधे केंद्र सरकार के अधीन आ गई है। 

24 आपत्तियों की सुनवाई के बाद अंतिम मुहर 

रेलवे प्रशासन ने जनवरी 2026 में इस जमीन के अधिग्रहण को लेकर प्रारंभिक सूचना प्रकाशित की थी, जिसका विवरण प्रमुख समाचार पत्रों में भी निकाला गया था। इसके बाद संबंधित जमीन स्वामियों व किसानों की तरफ से कुल 24 आपत्तियां (आक्षेप) दर्ज कराई गई थीं। भूमि अधिग्रहण से जुड़े सक्षम प्राधिकारी ने सभी 24 आपत्तियों पर निष्पक्ष सुनवाई करते हुए उनका विधिवत निस्तारण किया। इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी गई। रिपोर्ट मिलने के बाद रेल मंत्रालय ने औपचारिक घोषणा करते हुए जमीन पर अंतिम मुहर लगा दी।

मुंबई-दक्षिण भारत रूट पर क्यों बेहद अहम है यह ट्रैक?

वर्तमान में प्रयागराज जंक्शन और छिवकी से मुंबई, पुणे, नागपुर, बेंगलुरु और चेन्नई जाने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनें इसी रेलखंड से होकर गुजरती हैं। 

ट्रेनों का मुख्य मार्ग: प्रयागराज/छिवकी - इरादतगंज - शंकरगढ़ - मानिकपुर - सतना - कटनी - जबलपुर - इटारसी - भुसावल - मुंबई (LTT/CSMT)। 

बॉटलनेक का संकट

वर्तमान में इरादतगंज से मानिकपुर के बीच केवल दोहरी लाइन मौजूद है। इस ट्रैक पर ट्रेनों का दबाव अपनी तय क्षमता से कहीं अधिक (150 प्रतिशत से ज्यादा) रहता है। अत्यधिक ट्रैफिक के चलते मुंबई जाने वाली सुपरफास्ट व एक्सप्रेस ट्रेनों को भी आउटर या छोटे स्टेशनों पर घंटों सिग्नल के इंतजार में रोक दिया जाता है। तीसरी लाइन बिछने से यह रुकावट पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

यात्रियों को मिलेंगे फायदे 

ट्रेनों की बढ़ेगी रफ्तार और खत्म होगी लेटलतीफी

तीसरी लाइन बनने के बाद मुंबई, पुणे और जबलपुर रूट की ट्रेनों को बिना किसी बाधा के 'ग्रीन सिग्नल' मिलेगा। आउटर पर बेवजह खड़े रहने का झंझट खत्म होगा और ट्रेनें समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचेंगी। 

सफर में घंटों की बचत

कामायनी एक्सप्रेस, महानगरी एक्सप्रेस, प्रयागराज-LTT सुपरफास्ट और दुरंतो जैसी लंबी दूरी की ट्रेनों के यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। 

नई पैसेंजर व सुपरफास्ट ट्रेनों का रास्ता खुलेगा 

अभी तक ट्रैक पर जगह न होने की वजह से मुंबई रूट पर नई ट्रेनें शुरू करना मुश्किल था। तीसरी लाइन बनने से भविष्य में प्रयागराज और आसपास के जिलों से मुंबई के लिए नई ट्रेनें शुरू करने का रास्ता खुल जाएगा। 

मालगाड़ियों के लिए अलग क्षमता

कोयला, खाद्यान्न और औद्योगिक सामान ले जाने वाली मालगाड़ियों के लिए अलग पाथ उपलब्ध होगा, जिससे यात्री ट्रेनों की समयबद्धता (पंक्चुअलिटी) बिल्कुल प्रभावित नहीं होगी। 

किसानों को मिलेगा समय पर मुआवजा

गजट प्रकाशित होने के साथ ही बारा तहसील और आसपास के प्रभावित गांवों (जैसे नवजीवन, चकसेमरा, इरादतगंज आदि) के किसानों व जमीन मालिकों को रेलवे के तय नियमों के अनुसार उचित मुआवजा देने की कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है।

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