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दो पैन कार्ड मामले में आजम खां और अब्दुल्ला आजम को इलाहाबाद HC से बड़ी राहत, जमानत अर्जी मंजूर

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Thu, 29 Oct 2026 12:55 PM (IST)Updated: Thu, 29 Oct 2026 07:42 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पूर्व मंत्री आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड मामले में बड़ी ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दो पैन मामले में आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला की जमानत मंजूर कर ली है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दो पैन मामले में आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला की जमानत मंजूर कर ली है।

HighLights

  1. कोर्ट का दोषसिद्धि पर रोक से इन्कार, विधानसभा चुनाव लड़ने की राह स्पष्ट नहीं 

  2. कथित दो पैन कार्ड मामले में दर्ज दोषसिद्धि को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई

विधि संवाददाता, प्रयागराज। दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पूर्व मंत्री व सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी है, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। इससे विधानसभा चुनाव लड़ने की उनकी राह फिलहाल साफ नहीं हुई है।

कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा था

यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने गुरुवार को पारित किया। कोर्ट ने 15 अक्टूबर को आदेश सुरक्षित रख लिया था। पुनरीक्षण याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई के लिए जनवरी 2027 के तीसरे सप्ताह की तिथि तय की गई है।

रामपुर में एफआईआर दर्ज हुई थी

आकाश सक्सेना की तहरीर पर छह दिसंबर 2019 को रामपुर में एफआईआर दर्ज हुई थी। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम के पास दो पैन कार्ड हैं। पहला पैन कार्ड नंबर डीएफओपीके 614के है, इसमें जन्मतिथि पहली जनवरी 1993 दर्ज है, यही हाईस्कूल प्रमाण पत्र में है। इसी पैन कार्ड पर एसबीआई में खाता है और आयकर रिटर्न भरा जाता था।

एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराया था

अभियोजन के अनुसार 2017 में स्वार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए उम्र संबंधी अर्हता पूरी करने पिता आजम खां के साथ साजिश रचकर दूसरा पैन कार्ड नंबर डीडब्ल्यूएपीके 7513 आर बनवाया गया, इसमें जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 है। नामांकन पत्रों में उसका ही इस्तेमाल किया गया। रामपुर की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को दोनों को दोषी ठहराया था।

क्या सुनाई गई थी सजा?

बाद में राज्य सरकार की सजा बढ़ाने की अर्जी पर अपीलीय अदालत ने 20 अप्रैल और 23 मई 2026 को सजा में वृद्धि कर दी। आजम खां को आइपीसी की धारा 467 में 10 साल कठोर कारावास और दो लाख जुर्माना तथा अब्दुल्ला आजम को अधिकतम पांच से सात साल तक की कठोर कैद की सजा सुनाई।

आजम खां के वकीलों का तर्क 

हाई कोर्ट में आजम खां की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, एनआई जाफरी और अधिवक्ता शाश्वत आनंद ने पक्ष रखा। कहा कि दोनों की सजा निश्चित अवधि की है और वे लंबी अवधि से जेल में हैं, इसलिए अंतिम फैसला आने तक सजा निलंबित कर जमानत दी जाए। दोषसिद्धि पर रोक न लगने से वे चुनाव लड़ने से वंचित हो जाएंगे।

राज्य सरकार की ओर से दी गई दलील 

राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और अपर सरकारी अधिवक्ता परितोष मालवीय तथा शिकायतकर्ता के अधिवक्ता शरद शर्मा ने विरोध किया और आपराधिक इतिहास का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा, ‘कस्टडी सर्टिफिकेट के अनुसार आजम खां चार साल एक माह नौ दिन और अब्दुल्ला तीन साल छह माह 13 दिन सजा काट चुके हैं। यह जमानत का उचित आधार है।’ जुर्माने की आधी राशि तत्काल जमा करने की शर्त पर जमानत मंजूर की गई है।

आजम खां के खिलाफ 92 मुकदमे 

दोषसिद्धि को लेकर कोर्ट ने कहा कि आपराधिक पृष्ठभूमि, गंभीरता और सामाजिक प्रभाव देखना होता है। आजम खां के खिलाफ 92 मुकदमे हैं, आठ मामलों में सजा हो चुकी है, 81 मामले लंबित हैं। अब्दुल्ला पर 46 मुकदमे हैं और चार में सजा हो चुकी है। इसलिए दोषसिद्धि पर रोक लगाने का कोई न्यायोचित आधार नहीं है।

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