किसान बोले, न आश्वासन से समझौता होगा, न अधिकारों से
नोएडा प्राधिकरण पर 81 गांवों के किसानों का धरना अधिकारियों के आश्वासन के बाद 15 दिन के लिए स्थगित कर ...और पढ़ें

नोएडा में किसानों का धरना 15 दिन के लिए स्थगित, मांगों पर कार्रवाई न होने पर फिर होगा आंदोलन ( एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
नोएडा में किसानों का धरना 15 दिन के लिए स्थगित हुआ।
अधिकारियों ने किसानों की मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
15 दिन में कार्रवाई न होने पर आंदोलन फिर शुरू होगा।
जागरण संवाददाता, नोएडा। भारतीय किसान यूनियन मंच के नेतृत्व में सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण के मुख्य प्रशासनिक भवन पर 81 गांवों के किसानों का धरना अधिकारियों के आश्वासन के बाद 15 दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल त्यागी ने स्पष्ट किया कि आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। अगर इस अवधि में प्राधिकरण किसानों की मांगों पर ठोस और सकारात्मक कार्रवाई नहीं करता है, तो किसान अस्तित्व बचाओ आंदोलन फिर से उसी मजबूती से शुरू किया जाएगा। किसानों की आबादी, नक्शा नीति, पांच प्रतिशत प्लाट, वर्ष 1976-97 के किसान कोटे, गांवों के विकास और अन्य अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष जारी रहेगा।
प्राधिकरण को कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय दिया गया
त्यागी ने कहा कि प्राधिकरण को कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद आगे की रणनीति किसानों के साथ चर्चा कर तय की जाएगी। किसान अस्तित्व बचाओ आंदोलन के तहत बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में किसान फिर धरना स्थल पर पहुंचे। इस दौरान विमल त्यागी ने प्रशासन और प्राधिकरण के साथ पिछले दिन हुई वार्ता की जानकारी दी। दोपहर करीब 3 बजे नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी इंदु प्रकाश सिंह और एसीपी प्रवीन कुमार सिंह किसानों के बीच पहुंचे।
उन्होंने बैठक में हुई चर्चा और उसके विवरण से किसानों को अवगत कराया। अधिकारियों ने कहा कि प्राधिकरण किसानों की समस्याओं और वार्ता को लेकर गंभीर है तथा सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है। त्यागी ने बताया कि किसानों की आबादी और नक्शा नीति से जुड़े अहम विषय शासन स्तर पर रखे गए हैं। आगामी मंगलवार के आसपास लखनऊ में कैबिनेट स्तर की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें किसानों के इन मामलों पर चर्चा होगी।
पात्र किसानों के प्लॉट नहीं रोके जाने चाहिए
बैठक की जानकारी मिलने के बाद किसानों के साथ फिर वार्ता कर स्थिति स्पष्ट की जाएगी। पांच प्रतिशत प्लाट के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। किसानों का कहना था कि केवल अतिक्रमण के नाम पर पात्र किसानों के प्लाट नहीं रोके जाने चाहिए। वर्ष 1976-97 के किसान कोटे के प्लाटों के संबंध में प्राधिकरण से जानकारी मांगी गई है कि कितने किसानों को आवंटन मिला और कितने अब भी अधिकार से वंचित हैं। गांवों के विकास का मुद्दा भी वार्ता में उठाया गया।
संबंधित अधिकारियों को गांवों में जाकर विकास कार्यों का सर्वे करने और मूलभूत समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने को कहा गया। आंदोलन स्थल पर मौजूद किसानों और प्रतिनिधियों ने विचार-विमर्श के बाद प्राधिकरण को ठोस कार्रवाई के लिए 15 दिन देने पर सहमति जताई।
