पहले प्रेम, फिर शादी और अब आस्था की राह पर साथ-साथ; शिवम-मोनिका की कांवड़ यात्रा क्यों बनी चर्चा का विषय?
फलैदा निवासी शिवम भाटी और बुलंदशहर की मोनिका सोलंकी की प्रेम कहानी सफल होने के बाद अब वे पति-पत्नी के रूप में कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। ...और पढ़ें

शिवम और मोनिका की प्रेम कहानी सफल हुई, अब कांवड़ यात्रा पर।
HighLights
शिवम और मोनिका की प्रेम कहानी सफल हुई, अब कांवड़ यात्रा पर।
परिवार की सहमति के बाद पति-पत्नी के रूप में कांवड़ उठा रहे।
यात्रा में पशु प्रेम और शाकाहार का संदेश भी दे रहे हैं।
राधेश्याम बघेल, रबूपुरा। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कांवड़ यात्रा अपने साथ कई अनूठी और आस्था और मनोकामना से जुड़ी कहानियाें से भरी हुई है। रबूपुरा क्षेत्र के गांव फलैदा निवासी शिवम भाटी और बुलंदशहर के गांव फतेहपुर निवासी मोनिका सोलंकी की प्रेम कहानी परवान चढ़ने के बाद इसी यात्रा का हिस्सा बनी है।
दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे और शादी करना चाहते थे, लेकिन उनके स्वजन इसके लिए तैयार नहीं थे। दोनों ने भगवान भोलेनाथ से शादी की मनोकामना की।कुछ दिनों बाद स्वजन दोनों की शादी को तैयार हो गए। मनोकामना पूरी होने पर शिवम और मोनिका ने बाबा भोले नाथ को कांवड़ लाकर जलाभिषेक करने के लिए रबूपुरा पहुंचे हैं।
शिवम भाटी ने बताया कि मनोकामना पूरी होने के बाद दोनों परिवार शादी के लिए राजी हो गए और दोनों विवाह बंधन में बंध गए। अब शादी के बाद शिवम और मोनिका पति-पत्नी के रूप में हरिद्वार से पैदल गंगाजल लेकर नानकेश्वर महादेव मंदिर के लिए कांवड़ यात्रा कर रहे हैं।
रास्ते में वे लोगों को पशु प्रेम और शाकाहार अपनाने का संदेश भी दे रहे हैं। फिलहाल दोनों पति-पत्नी रबूपुरा नगर पंचायत की ओर से लगाए गए कांवड़ शिविर में ठहरे हुए हैं। उनकी अनूठी कांवड़ यात्रा और प्रेम कहानी राहगीरों व श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
मां की तबीयत ठीक हुई तो पिता ने बेटों के साथ उठाई कांवड़
रबूपुरा कस्बे के मोहल्ला फूल बिहार निवासी अमित भी अपने दो बेटों के साथ कांवड़ लेकर लौट रहे हैं। अमित के साथ उनके 10 वर्षीय पुत्र भारत और आठ वर्षीय दीपक भी कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। अमित ने बताया कि करीब एक वर्ष पहले उनकी मां की तबीयत बेहद खराब हो गई थी।
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उस समय उन्होंने भगवान महादेव से मनोकामना मांगी थी कि उनकी मां स्वस्थ हो जाएं। मां के स्वस्थ होने के बाद उन्होंने परिवार सहित हरिद्वार जाकर कांवड़ लाने का संकल्प लिया था। अब वह अपने दोनों बेटों के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे हैं।