हरनंदी का जलस्तर बढ़ा, डूब क्षेत्र में रहने वालों की बढ़ी चिंता; क्या पहाड़ों की बारिश से बिगड़ेंगे हालात?
पहाड़ी क्षेत्रों में भारी वर्षा के बाद हरनंदी नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है, जिससे नोएडा के डूब क्षेत्र में बसी अवैध कॉलोनियों के न ...और पढ़ें

पहाड़ी क्षेत्रों में भारी वर्षा के बाद हरनंदी नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। जागरण
HighLights
हरनंदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचा।
गाजियाबाद बैराज से 4700 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
डूब क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों के लोग चिंतित।
जागरण संवाददाता, नोएडा। पहाड़ी क्षेत्रों में झमाझम वर्षा के बाद हरनंदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। रविवार दोपहर करीब एक बजे गाजियाबाद स्थित हरनंदी बैराज से 4700 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। राहत की बात है कि गौतमबुद्ध नगर सीमा में नदी किनारे बसी अवैध कॉलोनियों में अंदर तक पानी नहीं पहुंचा है।
हालांकि चक-शाहबेरी, युसुफपुर, चोटपुर, बहलोलपुर समेत डूब क्षेत्र में अवैध मकान बनाकर रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गया है। जिला प्रशासन में उप-जिलाधिकारी ने 30 बाढ़ चौकियां, लेखपाल और पटवारियों समेत अन्य कर्मचारियों को अलर्ट कर दिया है।
आवासीय क्षेत्रों के किनारे हरनंदी का पानी पहुंचने पर लोग डर रहे हैं। गांवों में लोगों ने डूब क्षेत्र से पशुओं को हटाना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि जलस्तर बढने से सड़कें डूब जाती है। हालांकि अभी जलस्तर ज्यादा नहीं बढ़ा है। कालोनी के करीब पानी पहुंचने पर लोगाें ने अपने स्तर से सावधानी बरतना शुरू कर दिया है।
बहलोलपुर में रहने वाले छतर पाल का कहना है कि 2023 की तरह हरनंदी नदी में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा है। पिछले दो-तीन दिनों से झमाझम वर्षा होने के बाद जलस्तर बढ़ गया है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई हैं। इंटरनेट मीडिया पर लोग बाढ़ का पानी धीरे-धीरे भरने का वीडियो बना कर प्रसारित कर रहे हैं। यदि पहाड़ी क्षेत्रों में झमाझम वर्षा अगले कुछ दिन तक लगातार हुई तो निवासियों के लिए स्थिति चिंताजनक हो सकती है।
जिलाधिकारी मेधा रूपम ने दिया आश्वासन
जिलाधिकारी मेधा रूपम ने सभी लोगाें को सुरक्षित तरीके से रहने का आश्वासन दिया है। उप जिलाधिकारी अभिनेंद्र सिंह का कहना है कि दोपहर दो बजे हरनंदी में 4716 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। हालांकि जलस्तर की स्थिति सामान्य रही। डूब क्षेत्रों के किनारे कालोनियों में लगातार निगरानी बनी हुई है।
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बाढ़ चौकियों के अलावा तहसील के कर्मचारियों को गांवों में व्यवस्था बनवाने के लिए लगाया हुआ है। वहीं जिलाधिकारी मेधा रूपम ने अधिकारियों से लगातार समय हरनंदी की स्थिति पर रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
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