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    देश का पहला अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र बना नोएडा का चाइल्ड PGI, विदेशी डाक्टर लेंगे क्लिनिकल शिक्षा

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 12:00 AM (IST)

    चाइल्ड पीजीआई नोएडा भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र बन गया है, जहाँ थैलेसीमिया इंटरनेशनल फेडरेशन ने थैलेसीमिया फेलोशिप-2026 की घोषणा की है ...और पढ़ें

    नोएडा सेक्टर 30 स्थित चाइल्ड पीजीआई। फाइल फोटो

    नोएडा सेक्टर 30 स्थित चाइल्ड पीजीआई। फाइल फोटो

    HighLights

    1. चाइल्ड पीजीआई नोएडा भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र।

    2. थैलेसीमिया इंटरनेशनल फेडरेशन ने फेलोशिप-2026 की घोषणा की।

    3. विदेशी डॉक्टर थैलेसीमिया, सिकल सेल रोग का प्रशिक्षण लेंगे।

    सुमित शिशोदिया, नोएडा। चाइल्ड पीजीआइ (पीजीआइसीएच) में अब न केवल बाल मरीजों की बीमारियों का सफल इलाज होगा, बल्कि थैलेसीमिया, सिकल रोग और हीमोग्लोबिनोपैथी जैसी गंभीर बीमारी पर विदेश से जूनियर चिकित्सक आकर एडवांस्ड क्लिनिकल प्रशिक्षण लेकर अपने देश में मरीजों को नई जिंदगी भी दे पाएंगे।

    पीजीआइसीएच संस्थान को हीमोग्लोबिनपैथी देखभाल के क्षेत्र में ऐसी ही ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है, जिसमें थैलेसीमिया इंटरनेशनल फेडरेशन ने पीजीआइ संस्थान में थैलेसीमिया फेलोशिप-2026 शुरू करने की घोषणा की है।

    इसी के साथ यह भारत में क्लिनिकल शिक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र के रूप में पहला संस्थान बन गया है।

    थैलेसीमिया इलाज के लिए अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप

    दो नवंबर से शुरू होने वाला अंतरराष्ट्रीय थैलेसीमिया फेलोशिप कार्यक्रम विशेष रूप से भारत और विदेशों के उन डाक्टरों के लिए डिजाइन किया गया है, जो गंभीर बीमारियों में सफल इलाज के लिए क्लिनिकल विशेषज्ञता बढ़ाना चाहते हैं।

    इसमें फ्रांस, जर्मनी, आस्ट्रेलिया, कनाड़ा समेत अन्य देशों में थैलेसीमिया और सिकल सेल रोग के इलाज व प्रबंधन से जुड़े रेजिडेंट चिकित्सकों को मल्टी-डिसिप्लिनरी माहौल व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    पीडियाट्रिक हेमेटोलाजी आन्कोलाजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन विभाग की प्रमुख डा. नीता राधाकृष्णन ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप भारत में सरकारी मेडिकल कालेजों और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में काम करने वाले पीडियाट्रिशियन और डाक्टरों के लिए है ।

    इसका उद्देश्य व्यापक हीमोग्लोबिनोपैथी देखभाल में राष्ट्रीय क्षमता का निर्माण करना है। रणनीति है कि प्रशिक्षण से चिकित्सकों को क्लिनिकल अनुभव मिलेगा और केस-आधारित चर्चाओं से ज्ञान भी अर्जित करेंगे।

    यही नहीं मल्टी-डिसिप्लिनरी क्लीनिक, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, आयरन ओवरलोड की निगरानी, एंडोक्राइन और हृदय संबंधी जटिलताओं के प्रबंधन में भाग लेंगे।

    विशेषज्ञ की मानें तो चाइल्ड पीजीआइ में प्रतिभागी विदेशी चिकित्सक पीडियाट्रिक, हेमेटोलाजी, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, नर्सिंग, पोषण और मनो-सामाजिक देखभाल के विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करेंगे।

    भारत के दो डॉक्टरों के लिए भी स्वर्णिम अवसर 

    डा. नीता राधाकृष्णन के मुताबिक, फेलोशिप-2026 भारत में हीमोग्लोबिनोपैथी देखभाल में स्पेशलिस्ट विशेषज्ञता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। फेलोशिप के आवेदन शुरू हो चुके हैं। पहली फेलोशिप में देश के दो डाक्टरों को सहायता दी जाएगी।

    यह अहम पहल थैलेसीमिया देखभाल में भारत की बढ़ती लीडरशिप को मजबूत करेगी और हीमोग्लोबिन विकार के मरीजाें के लिए विशेष क्लिनिकल प्रशिक्षण लेकर अपनी गहन जानकारी से अगली पीढ़ी को तैयार करने एक महत्वपूर्ण निवेश भी है।

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