पीजीआई चंडीगढ़ का ‘डे बेड’ 13 अगस्त को शिकागो में होगा नीलाम, केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग
पीजीआई चंडीगढ़ का एक 'डे बेड' 13 अगस्त को शिकागो में नीलाम होने की खबर से संस्थान की विरासत संपत्ति की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। अधिवक्ता अजय जग्गा ने ...और पढ़ें

विरासत संपत्ति की सुरक्षा को लेकर खड़े हुए सवाल।
HighLights
PGI चंडीगढ़ का 'डे बेड' 13 अगस्त को शिकागो में नीलाम होगा।
अधिवक्ता अजय जग्गा ने नीलामी रोकने और जांच की मांग की।
विरासत संपत्ति की सुरक्षा पर सवाल, अवैध निर्यात की आशंका।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। पीजीआई चंडीगढ़ की विरासत से जुड़े एक फर्नीचर के 13 अगस्त को अमेरिका के शिकागो में नीलाम होने की सूचना के बाद संस्थान की विरासत संपत्ति की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस मामले में अधिवक्ता एवं चंडीगढ़ हेरिटेज प्रोटेक्शन सेल के सदस्य अजय जग्गा ने पीजीआई के निदेशक डॉ. विवेक लाल और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र भेजकर प्रस्तावित नीलामी पर तत्काल आपत्ति दर्ज कराने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
जग्गा के अनुसार शिकागो में 13 अगस्त को होने वाली नीलामी में पीजीआई चंडीगढ़ से संबंधित एक ‘डे बेड’ को शामिल किया गया है। नीलामी सूची में इसका लॉट नंबर 165 बताया गया है।
यह टीक (सागौन) की लकड़ी और अपहोल्स्ट्री से बना फर्नीचर है, जिसका आकार 28×72×36 इंच बताया गया है। इसकी अनुमानित कीमत 8,000 से 10,000 अमेरिकी डॉलर रखी गई है। फर्नीचर पर ‘NH’, ‘PGI’ और ‘55’ जैसे निशान अंकित दिखाई देते हैं। शिकायतकर्ता ने ‘NH’ को नेहरू अस्पताल से संबंधित होने की संभावना जताई है।
जग्गा ने अपने पत्र में कहा कि इससे पहले जून 2026 में भी अमेरिका में पीजीआई की एक वस्तु, जिसे उन्होंने स्टूल बताया है, नीलाम की गई थी। उनका कहना है कि उस समय भी उन्होंने पीजीआई को इसकी जानकारी दी थी।
अब दोबारा पीजीआई से जुड़ी वस्तु की विदेश में नीलामी सामने आने के बाद यह पता लगाना जरूरी है कि ये वस्तुएं अमेरिका तक कैसे पहुंचीं। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या पीजीआई ने अपनी कोई विरासत संपत्ति बेची है? यदि नहीं, तो इन वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए संस्थान ने क्या कदम उठाए? उन्होंने इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए विस्तृत जांच की मांग की है।
खबरें और भी
जग्गा ने संविधान के अनुच्छेद 49 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य का दायित्व है कि राष्ट्रीय महत्व की ऐतिहासिक एवं कलात्मक वस्तुओं को नुकसान, नष्ट होने, हटाए जाने, निपटान अथवा निर्यात से सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 51ए(एफ) के तहत देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के नागरिक दायित्व का भी उल्लेख किया है।
उन्होंने केंद्र सरकार और पीजीआई से मांग की है कि प्रस्तावित नीलामी को रोकने के लिए तत्काल आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक कदम उठाए जाएं। साथ ही भारत में संबंधित एजेंसियों के माध्यम से यह जांच कराई जाए कि फर्नीचर भारत से अमेरिका कैसे पहुंचा और इसके निर्यात तथा अमेरिका में आयात के दौरान क्या सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन हुआ।
जग्गा ने अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से वहां की संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों से भी जानकारी लेने की मांग की है कि नीलामी घर के पास यह वस्तु किस आधार पर पहुंची और वह वैध रूप से उसके कब्जे में थी या नहीं।
उनका कहना है कि तथ्यों की जांच के बाद यदि वस्तु अवैध तरीके से भारत से बाहर ले जाए जाने की पुष्टि होती है तो उसे वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने पीजीआई से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि फर्नीचर पर अंकित इन्वेंटरी नंबर और अन्य पहचान चिह्न संस्थान के रिकॉर्ड से मेल खाते हैं या नहीं। उनका कहना है कि विस्तृत जांच से यह सामने आ सकता है कि पीजीआई की विरासत संपत्ति किसके माध्यम से अमेरिका पहुंची।
अजय जग्गा ने पीजीआई और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से मामले को गंभीरता से लेते हुए 13 अगस्त की प्रस्तावित नीलामी से पहले तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है, ताकि यदि वस्तु वास्तव में पीजीआई की विरासत संपत्ति है तो उसे नीलाम होने से रोका जा सके और उसकी वापसी सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया जा सके।