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174 यात्रियों की जान बचाने वाले कैप्टन स्मित के शीघ्र स्वस्थ होने की हनुमद्धाम में कामना, यहां है 77 फुट ऊंची बजरंगबली की प्रतिमा

By Rohitash Verma Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Mon, 05 Oct 2026 03:42 PM (IST)

Captain Smit Machhar: फ्लाईदुबई की उड़ान में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले कैप्टन स्मित मच्छार के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ ...और पढ़ें

HighLights

  1. 174 यात्रियों की जान बचाने वाले पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के साहस की सराहना।

  2. मुजफ्फरनगर में शुकतीर्थ में गंगा तट पर स्थित हनुमद्धाम श्रद्धा का है केंद्र।

संवाद सूत्र, भोपा (मुजफ्फरनगर)। फ्लाईदुबई की उड़ान में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के साहस की देशभर में सराहना हो रही है। तीर्थनगरी शुकतीर्थ स्थित हनुमद्धाम में उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की गई।

विपत्ति के समय हनुमान जी का स्मरण देता है साहस और आत्मबल: स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती

हनुमद्धाम के स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि हनुमान जी संकटमोचन हैं। विपत्ति के समय उनका स्मरण मनुष्य को साहस और आत्मबल प्रदान करता है। कैप्टन स्मित ने जिस तरह संकट के बीच हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए अपना धैर्य बनाए रखा, वह सनातन संस्कृति और आस्था की शक्ति को दर्शाता है। हनुमान जी भगवान श्रीराम के परम भक्त और आदर्श सेवक हैं। उनकी आराधना करने वाले भक्त को संकट में संबल मिलता है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से वीडियो काॅल पर बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित ने बताया था कि संकट के समय वह हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। कहा था कि वे देश से दूर हैं, लेकिन अपनी संस्कृति से दूर नहीं हैं।

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वर्ष 1987 में हुई थी हनुमद्धाम की स्थापना

महाभारत कालीन पौराणिक तीर्थनगरी शुकतीर्थ में गंगा तट पर स्थित हनुमद्धाम श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। यहां 77 फुट ऊंची हनुमान जी की विशाल प्रतिमा के साथ नक्षत्र वाटिका, नवग्रह, पंचवटी और विभिन्न प्रजातियों के वृक्ष श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। देशभर से श्रद्धालु हनुमद्धाम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

महंत स्वामी आनंद स्वरूपानंद महाराज ने बताया कि महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज के द्वारा वर्ष 1987 में गोलोकवासी सुदर्शन सिंह चक्र जी महाराज के सानिध्य में हनुमद्धाम की स्थापना हुई थी। यहां स्थापित 77 फुट ऊंची हनुमान प्रतिमा के विग्रह में देश की विभिन्न भाषाओं में कागज पर लिखे 700 करोड़ राम नाम समाहित किए गए हैं। इनका वजन करीब 14 टन और क्षेत्रफल 10,050 घन फीट बताया गया है। धाम परिसर में विश्व की विभिन्न वानर प्रजातियों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।

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भागवत कथा की उद्गमस्थली है शुकतीर्थ

मुजफ्फरनगर जिले में गंगा तट पर पौराणिक तीर्थनगरी शुकतीर्थ बसी है। मान्यता के अनुसार राजा परीक्षित को मोक्ष दिलाने के लिए महर्षि शुकदेव मुनि ने इसी पावन धरा पर प्राचीन अक्षय वट वृक्ष के नीचे बैठकर सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया था। इसी कारण शुकतीर्थ को भागवत कथा की उद्गमस्थली और शुकदेव की तपोभूमि कहा जाता है।

यहां स्थित प्राचीन अक्षयवट, शुकदेव मंदिर, गंगा घाट और विभिन्न आश्रम श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। देशभर से श्रद्धालु गंगा स्नान, पूजा-अर्चना और संतों के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। पर्व और धार्मिक अवसरों पर शुकतीर्थ की आध्यात्मिक आभा देखते ही बनती है।