प्रसव के बाद अचानक बच्चे से दूरी बनाने लगी मां? 'ऊपरी हवा' समझकर न करें नजरअंदाज, हो सकती है यह गंभीर बीमारी
प्रसव के बाद मां का बच्चे से दूरी बनाना या व्यवहार में बदलाव गंभीर मानसिक समस्या हो सकती है। पोस्टपार्टम ब्लूज, डिप्रेशन और साइकोसिस के लक्षणों को पहच ...और पढ़ें

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पोस्टपार्टम ब्लूज से लेकर साइकोसिस तक अलग-अलग रूप में दिखते हैं लक्षण
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। घर में नवजात के आने की खुशी... मां की गोद में बच्चे को देखने की उम्मीद... लेकिन प्रसव के बाद यदि मां अचानक बच्चे से दूरी बनाने लगे, उसे गोद में लेने या दूध पिलाने में रुचि न दिखाए और उसका व्यवहार भी बदल जाए तो परिवार को इसे केवल कमजोरी, जिद या ‘ऊपरी हवा’ का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
प्रसव के बाद महिलाओं में होने वाले मानसिक बदलाव कई बार गंभीर रूप ले सकते हैं। समय रहते पहचान और उपचार से मां और बच्चे दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। मनोरोग विशेषज्ञ डा. कार्तिकेय गुप्ता के अनुसार, प्रसव के बाद मानसिक बदलाव को तीन स्तरों पर समझना जरूरी है।
पोस्टपार्टम ब्लूज में उदासी, बिना वजह रोने का मन, चिड़चिड़ापन और बेचैनी हो सकती है। यह सामान्य कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन यही लक्षण लंबे समय तक बने रहें, बढ़ते जाएं या महिला बच्चे से लगातार दूरी बनाने लगे तो पोस्टपार्टम डिप्रेशन की आशंका हो सकती है।
पोस्टपार्टम साइकोसिस सबसे गंभीर स्थिति है। इसमें महिला को वास्तविकता समझने में परेशानी, भ्रम, असामान्य व्यवहार या ऐसी आवाजें सुनाई देने जैसी शिकायत हो सकती है। यह चिकित्सकीय आपात स्थिति है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर महिला को अकेला न छोड़ें और तत्काल मनोरोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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मनोरोग विशेषज्ञों के पास करीब पांच से 10 प्रतिशत तक ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि बच्चे को दूध न पिलाना अकेले मानसिक बीमारी का प्रमाण नहीं है। लेकिन यदि इसके साथ लगातार उदासी, बच्चे से दूरी, अत्यधिक बेचैनी या असामान्य व्यवहार दिखाई दे तो इसे गंभीरता से लेना जरूरी है।
केस एक :- प्रसव के बाद से रहने लगी थी उदास
27 वर्षीय निशा (काल्पनिक नाम) ने बच्चे को जन्म दिया। परिवार को उम्मीद थी कि वह नवजात को गोद में लेकर खुश होगी, लेकिन वह लगातार उदास रहने लगी। बच्चे को गोद में लेने से बचती और दूध पिलाने में भी रुचि नहीं दिखाती थी।
परिवार ने इसे प्रसव के बाद की कमजोरी समझा। बाद में लगातार उदासी और बच्चे से दूरी बढ़ने पर विशेषज्ञ से परामर्श कराया गया। काउंसिलिंग और चिकित्सकीय उपचार के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ।
केस दो :- महिला की बातों को स्वजन ने माना ऊपरी हवा
30 वर्षीय सना (काल्पनिक नाम) प्रसव के कुछ समय बाद असामान्य बातें करने लगी। उसे भ्रम होने लगा और वह ऐसी आवाजें सुनने की बात कहती थी, जो वास्तव में मौजूद नहीं थीं। परिवार पहले इसे ऊपरी असर मान रहा था। चिकित्सकीय जांच में गंभीर मानसिक समस्या की आशंका सामने आई। तत्काल विशेषज्ञ उपचार मिलने पर स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।
इसका रखें ध्यान
- महिला को दोषी या बुरी मां न कहें
- उसे पर्याप्त आराम और भावनात्मक सहयोग दें
- व्यवहार में अचानक बदलाव को नजरअंदाज न करें
- लगातार लक्षण रहने पर मनोचिकित्सक से परामर्श लें
- भ्रम, आवाजें सुनाई देने या वास्तविकता से संपर्क टूटने पर विशेषज्ञ मदद लें
- मां और नवजात दोनों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें