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7 साल की उम्र में झड़े सिर के बाल, बीमारी से लड़कर बनाई खुद की कंपनी; अब 9 महिलाओं को दे रहीं रोजगार

Published: Mon, 12 Oct 2026 06:00 PM (IST)

यशिका अग्रवाल ने बचपन में एलोपेसिया से जूझने के बाद प्राकृतिक उत्पादों से प्रेरित होकर 'चित्तम आर्गेनिक्स' की शुरुआत की। ...और पढ़ें

अपने ऑर्गेनिक उत्पाद को डिस्प्ले में लगाती यशिका। सौ.स्वयं

अपने ऑर्गेनिक उत्पाद को डिस्प्ले में लगाती यशिका। सौ.स्वयं

HighLights

  1. 30-40 हजार रुपये से शुरु किया चित्तम आर्गेनिक्स, नौ महिलाओं को रोजगार से जोड़ा

  2. चार साल से उत्पाद बनाने का अनुभव, क्लिनिकल साइकोलाजी में कर चुकीं एमए

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। बचपन में एलोपेसिया और त्वचा संबंधी परेशानियों से जूझीं यशिका अग्रवाल ने कभी नहीं सोचा था कि यही अनुभव आगे चलकर उनकी पहचान की वजह बनेंगे। अपनी परेशानी के दौरान उन्होंने मां को प्राकृतिक और आयुर्वेदिक सामग्री से घरेलू उत्पाद बनाते देखा। मां के इसी प्रयास ने उनके मन में प्राकृतिक उत्पादों के प्रति रुचि जगाई।

समय के साथ यह रुचि आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा में बदल गई। आज यशिका न केवल अपना उद्यम चला रही हैं, बल्कि नौ महिलाओं को भी काम से जोड़कर उनकी कमाई का जरिया बनी हैं।

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लाजपत नगर निवासी यशिका का जन्म 21 जुलाई 1998 को हुआ। सात साल की उम्र तक एलोपेसिया के कारण उनके सिर के सभी बाल झड़ गए थे। इस दौरान उनकी मां मोना अग्रवाल ने प्राकृतिक और आयुर्वेदिक सामग्री से उत्पाद बनाने शुरू किए।

यशिका के अनुसार, 17 वर्ष की उम्र तक उनके बालों की स्थिति में सुधार हुआ। इस अनुभव ने उन्हें अपनी देखभाल और प्राकृतिक उत्पादों के महत्व को समझने का अवसर दिया। क्लिनिकल साइकोलाजी में एमए कर चुकीं यशिका को थेरेपी के क्षेत्र में भी चार साल से अधिक का अनुभव है।

पिता के सहयोग से रखी आत्मनिर्भरता की नींव

यशिका ने एक अक्टूबर 2021 को 23 वर्ष की उम्र में पिता संजय कुमार से मिली 30 से 40 हजार रुपये की पूंजी से चित्तम आर्गेनिक्स की शुरुआत की। घर से शुरु हुए इस काम में शुरुआती दौर में साबुन और क्रीम तैयार किए जाते थे।

धीरे-धीरे उत्पादों का दायरा बढ़ा और अब वह त्वचा व बालों की देखभाल से जुड़े कई तरह के उत्पाद तैयार कर रही हैं। ई-कामर्स कंपनियों के माध्यम से उनके उत्पाद ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं।

हर महीने 100 से अधिक आर्डर मिलते हैं और उद्यम की सालाना बिक्री छह अंकों में पहुंच चुकी है। वर्ष 2024-25 में मुंबई के गिफ्ट्स इंडिया एक्सपो में उत्पाद प्रदर्शित करना भी उनके सफर का अहम पड़ाव रहा।

अपने साथ दूसरी महिलाओं को भी बढ़ाया आगे

यशिका के लिए आत्मनिर्भरता का अर्थ सिर्फ खुद की पहचान बनाना नहीं, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर देना है। शुरुआत में उनके साथ छह महिलाएं काम कर रही थीं।

पिछले दो महीने में यह संख्या बढ़कर नौ हो गई है। ये महिलाएं उत्पाद तैयार करने, उनकी पैकेजिंग और आर्डर भेजने जैसे कामों में सहयोग करती हैं।

यशिका उन्हें काम और बिक्री के आधार पर भुगतान करती हैं। कटघर निवासी रेशम ने बताया कि काम खोजने के दौरान उन्हें चित्तम के बारे में जानकारी मिली आज वह यशिका के साथ काम कर रहीं हैं।

देशभर में यात्रा कर जुटाये उत्पाद

अपने उत्पादों को पूरी तरह आर्गेनिक बनाने के लिए यशिका ने पूरे देश भर की यात्रा की है। उनका कहना है कि प्रोडक्ट को आर्गेनिक बनाने के लिए कश्मीर से लेवेंडर, हेयर-केयर की जड़ी बूंटियां केरल से आम्बा हल्दी महाबलेश्वर आदि से लायी जा रही है।

अब उद्यम को विस्तार देने की तैयारी

अब तक घर के एक कमरे से इस काम को चला रहीं यशिका अब अपने काम को और व्यवस्थित रुप से आगे बढ़ाने के लिए कार्यालय खोलने की तैयारी कर रही हैं। दिवाली के लिए वह त्वचा की देखभाल से जुड़े उत्पादों के गिफ्टिंग हैम्पर भी तैयार कर रही हैं।

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