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रामगंगा नदी का जलस्तर 189.80 मीटर पहुंचा; मुरादाबाद में बारिश का 10 साल का रिकॉर्ड टूटा, प्रशासन अलर्ट

Published: Mon, 07 Sep 2026 03:58 PM (IST)

मुरादाबाद में रामगंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर नीचे है, जबकि जिले में बारिश का 10 ...और पढ़ें

रामगंगा का जलस्तर बढ़ने पर नाव से खेत को जाते किसान जागरण

रामगंगा का जलस्तर बढ़ने पर नाव से खेत को जाते किसान जागरण

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। लगातार बारिश के बीच रामगंगा समेत जिले की प्रमुख नदियों के जलस्तर पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। सोमवार को जारी बाढ़ नियंत्रण विभाग की दैनिक गेज-वर्षा रिपोर्ट के अनुसार मुरादाबाद में रामगंगा नदी का जलस्तर 189.80 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 190.60 मीटर है। इस तरह नदी फिलहाल खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।

ठाकुरद्वारा और मूंढापांडे क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों मानपुर पट्टी, लालपुर तीतरी, खरक, शरीफनगर, सुरजननगर, भगतपुर टांडा और आसपास के निचले इलाकों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।

राहत और बचाव के लिए पीएसी की दो नावें भेजी गई हैं। जरूरत पड़ने पर इन नावों से ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और आपात स्थिति में बचाव कार्य किया जाएगा। गांवों में पानी की स्थिति और ग्रामीणों की आवाजाही पर भी नजर रखी जा रही है।

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पिछले 24 घंटे में जिले में 34.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। 15 जून से सात सितंबर तक कुल 939.6 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। मानसून काल में पिछले 10 वर्षों की औसत वर्षा 891.64 मिलीमीटर है।

इस वर्ष अब तक बारिश सामान्य औसत से करीब 48 मिलीमीटर अधिक हो चुकी है। बिजनौर बैराज पर गंगा का जलस्तर 218.80 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का स्तर 220 मीटर है। हरिद्वार बैराज पर गंगा का जलस्तर 286.20 मीटर रहा। तिगरी में गंगा 200.65 मीटर पर दर्ज की गई।

कालागढ़ बांध में रामगंगा का जलस्तर 354.790 मीटर रहा। विभिन्न बैराजों और बांधों के जलस्तर पर भी विभाग लगातार निगाह रख रहा है। तटबंधों की स्थिति सुरक्षित बाढ़ नियंत्रण विभाग की रिपोर्ट में प्रमुख तटबंधों की स्थिति फिलहाल सुरक्षित बताई गई है।

हसनपुर बंध प्रथम और द्वितीय चरण, पप्सरा रिंग बंध, मोहम्मदाबाद रिंग बंध और तिगरी रिंग बंध की निगरानी की जा रही है। अधिकारियों की विशेष नजर रामगंगा के जलस्तर पर है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बाढ़ नियंत्रण कक्ष सक्रिय है।

प्रभावित गांवों में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए बचाव संसाधन तैयार रखे गए हैं। जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी होने पर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की कार्रवाई की जाएगी।

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