मीरजापुर में गरीबों के खातों से साइबर ठगी, 5 करोड़ के फ्रॉड में 4 कॉलेज छात्र गिरफ्तार; लैपटॉप-कार बरामद
मीरजापुर में चार कॉलेज छात्रों को 5 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इन छात्रों ने गरीब लोगों के नाम पर 50 से अधिक म्यूल ख ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
चार कॉलेज छात्र 5 करोड़ साइबर ठगी में गिरफ्तार।
गरीबों के नाम पर 50 से अधिक म्यूल खाते खोले।
लैपटॉप, मोबाइल, चेकबुक और कार भी बरामद हुई।
जागरण संवाददाता, मीरजापुर। बीए, बीकॉम और डीफार्मा की पढ़ाई कर रहे चार छात्रों ने देश के अन्य साइबर ठगों के गिरोह से जुड़कर गरीब लोगों के नाम पर 50 से अधिक म्यूल खाते खुलवाए और चार साल में करीब पांच करोड़ रुपये की साइबर ठगी कर डाली।
पुलिस की संयुक्त टीम ने उभरिया डिग्री कॉलेज के पास से चारों आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के पास से दो लैपटाप, नौ मोबाइल फोन, एक सीपीयू, नौ चेकबुक, एटीएम कार्ड, सात पासबुक, नौ आधार कार्ड, एक ड्राइविंग लाइसेंस और चार पहिया वाहन बरामद हुआ है।
अपर पुलिस अधीक्षक आपरेशन राजकुमार मीना ने सोमवार को बताया कि साइबर सेल के एनसीआरबी पोर्टल पर बैंक की ओर से शिकायत मिलने के बाद साइबर थाने में तैनात दारोगा जय प्रकाश शर्मा ने गत सात अगस्त को अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
इसके बाद पुलिस की तीन टीमें गठित कर जांच शुरू की गई तो आशीष सिंह, कपिल देव भारद्वाज उर्फ मोनू, युवराज सिंह उर्फ राजा और आदर्श सिंह उर्फ मोनू के नाम सामने आए। चारों छात्र हैं। आशीष, कपिल देव और युवराज चुनार के डिग्री कालेजों में बीए व बीकाम कर रहे हैं, जबकि आदर्श दिल्ली के एक कालेज से डीफार्मा कर रहा है।
खबरें और भी
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2022 से आरोपित गांवों में जाकर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को खाता खुलवाने पर पांच हजार रुपये के साथ आवास, वृद्धा पेंशन और लोन जैसी योजनाओं का लाभ दिलाने का लालच देते थे। आधार कार्ड लेकर खाते खुलवाने के बाद एटीएम कार्ड, पासबुक और चेकबुक अपने पास रख लेते थे।
इन खातों में साइबर ठगी की रकम आने के बाद उसे निकाल लिया जाता था। अनुमान है कि गिरोह ने जिले में एक्सिस, आईसीआईसीआई, बंधन और एचडीएफसी बैंक में खाते खुलवाकर करीब पांच करोड़ रुपये की ठगी की।
ऐसे सामने आया मामला
पांच हजार रुपये मिलने के कारण लोग अपने खाते के इस्तेमाल पर ध्यान नहीं देते थे। किसी महीने में खाते से 15 से 20 लाख रुपये का लेनदेन होने पर बैंक की ओर से फोन किया जाता और रकम के स्रोत के बारे में पूछा जाता तो उन्हें कोई जानकारी नहीं होती थी। संदेह होने पर शिकायत की गई, जिसके बाद साइबर ठगी का मामला सामने आया।