विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

फांसी की सजा सुनते ही मुस्कान ने दी बेटियों की दुहाई, जज से बोली- रहम कीजिए; साहिल रहा गुमसुम

Published: Wed, 14 Oct 2026 09:10 PM (IST)

मेरठ के सौरभ हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है। मुस्कान ने अपनी दो छोटी ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. सौरभ हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड।

  2. मुस्कान ने बेटियों का हवाला देकर रहम की गुहार।

  3. साहिल सुनवाई के दौरान गुमसुम और शांत रहा।

जागरण संवाददाता, मेरठ। सौरभ हत्याकांड का निर्णय सुनाने की तारीख 14 अक्टूबर पहले से तय थी। जिला जज की अदालत के बाहर सुबह 10 बजे से ही मीडिया जुटा था। साढ़े 10 बजे जिला कारागार से मुस्कान और साहिल को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। मुस्कान बेटी को गोद में लिए थी।

डीजीसी केके चौबे के मुताबिक, जिला जज अरविंद कुमार मिश्र ने कंप्यूटर स्क्रीन पर साहिल-मुस्कान को देखकर कहा कि आज सजा के बिंदु पर सुनवाई है। उन्होंने दोनों से शिक्षा के बारे में पूछा। दोनों ने खुद को स्नातक बताया। स्वास्थ्य के बारे में पूछने पर दोनों ने स्वस्थ होने की बात कही।

सफाई में कुछ कहने के सवाल पर मुस्कान ने कहा कि उसकी दो छोटी बेटियां हैं और उन्हें ध्यान में रखकर न्याय किया जाना चाहिए। साहिल से भी पूछा गया, लेकिन वह गुमसुम रहा। अंत में दोनों ने कहा कि उन्हें अदालत के न्याय पर पूरा भरोसा है।

दोनों तरफ से करीब सवा घंटे बहस

सवा 11 बजे से अदालत में सौरभ हत्याकांड को लेकर मुस्कान-साहिल की तरफ से मुख्य प्रतिरक्षा अधिवक्ता रेखा जैन और सौरभ की तरफ से शासकीय अधिवक्ता केके चौबे मौजूद थे। दोनों तरफ से करीब सवा घंटे बहस हुई। रेखा जैन ने मुस्कान और साहिल के बचाव में अपनी दलील रखी है, जबकि केके चौबे ने दोनों को फांसी दिलाने के लिए साक्ष्य और पुरानी घटनाओं के उदाहरण पेश किए।

दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने निर्णय के लिए चार बजे का समय निश्चित कर दिया। शाम को 4:05 मिनट पर जिला जज अरविंद कुमार मिश्र कोर्ट में पहुंचे। उससे पहले ही जेल से मुस्कान और साहिल को आनलाइन जोड़ लिया था।

जज बोले- निर्णय की अंतिम घड़ी

केके चौबे ने बताया कि जिला जज ने साहिल और मुस्कान से कहा कि निर्णय की अंतिम घड़ी आ गई है। बीएनएस की धारा 103(1) के साथ धारा 3(5) के तहत हत्या का दोषी मानते हुए मृत्युदंड दिया जाता है। साथ ही 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जाता है। जुर्माना अदा नहीं करने पर प्रत्येक दोषी को पांच माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मृत्युदंड का निष्पादन माननीय उच्च न्यायालय की पुष्टि के अधीन रहेगा।

वहीं, धारा 238(ए) के तहत साक्ष्य मिटाने के अपराध में दोनों को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी जाती है। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

सवा चार बजे निर्णय सुनते ही अधिवक्ताओं के खचाखच भी कोर्ट का माहौल ही बदल गया। अधिवक्ताओं ने भारत माता की जय के नारे लगाते हुए जोर से तालियां बजाई। उसके बाद जज उठकर चले गए। तभी अधिवक्ताओं ने कोर्ट रूम के बाहर भी खुशी का इजहार किया। बताया कि यह निर्णय एक मिशाल बनेगा।

यह भी पढ़ें- ब्लू ड्रम वाली मुस्कान ही नहीं, इन महिलाओं को भी मिली थी मौत की सजा; फिर क्यों नहीं हुई फांसी?

यह भी पढ़ें- मुस्कान-साहिल को फांसी की सजा: महाभारत का उदाहरण देते हुए जज बोले- ऐसे जघन्य अपराध करने वालों को दंड देना न्यायालय का धर्म