मुस्कान-साहिल को फांसी की सजा: महाभारत का उदाहरण देते हुए जज बोले- ऐसे जघन्य अपराध करने वालों को दंड देना न्यायालय का धर्म
Blue drum murder case: मेरठ की अदालत ने 591 दिन बाद चर्चित सौरभ हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ...और पढ़ें

सौरभ, मुस्कान और साहिल के फाइल फोटो
HighLights
बुधवार को जिजा जज अरविंद कुमार मिश्र के सजा सुनाते ही कोर्ट परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
चर्चित सौरभ हत्याकांड में अदालत ने 591 दिन बाद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
जागरण संवाददाता, मेरठ। चर्चित सौरभ हत्याकांड में अदालत ने 591 दिन बाद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। बुधवार की शाम सवा चार बजे निर्णय के बाद कोर्ट रूम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहां मौजूद सौरभ की मां की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने जज से कहा, सौरभ की आत्मा को आज शांति मिली होगी।
मुस्कान और साहिल जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई से जुड़े थे। निर्णय सुनाने से पहले जिला जज ने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी धर्म का पालन किया गया था। ऐसे जघन्य अपराध करने वाले व्यक्ति को उसके अनुरूप दंडित करना भी न्यायालय का धर्म है। समाज में स्वस्थ वातावरण बनाए रखने के लिए धर्म का पालन जरूरी है। इसे उचित मानते हुए अदालत ने सजा सुनाई।
11 साल पहले ब्रह्मपुरी के इंद्रानगर निवासी सौरभ राजपूत ने गौरीपुरा निवासी मुस्कान रस्तोगी से 2016 में प्रेम विवाह किया किया। 2019 में परिवारिक विवाद के चलते सौरभ और मुस्कान अलग अलग हो गए। इसी वर्ष मुस्कान ने बेटी पीहू को जन्म दिया, जो अब नाना-नानी के पास रहती है।
इसी बीच स्कूल के सहपाठी इंद्रानगर निवासी साहिल शुक्ला से शापरिक्स माल पर मुस्कान की मुलाकात हुई। सौरभ के विदेश से लौटने के बाद 24 फरवरी 2025 को मुस्कान और साहिल ने उसकी हत्या की पटकथा लिख दी। तीन मार्च की रात को दोनों ने मिलकर सौरभ को सब्जी में नशीला लिक्विड दिया।
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उसके बाद चाकू से दिल और गर्दन पर वारकर हत्या की। उसके शरीर के चार टुकड़े कर शव को नीले ड्रम में सीमेंट डालकर जमा दिया। उसके बाद दोनों ही हिमाचल घूमने चले गए। वहां से 17 मार्च को लौटने के बाद 18 मार्च को घटना का पर्दाफाश हुआ और 19 मार्च को साहिल और मुस्कान को पकड़कर पुलिस ने जेल भेज दिया।
591 दिन बाद अदालती कार्रवाई पूरी होने के बाद जिला जज अरविंद कुमार मिश्र की अदालत ने मुजरिम मुस्कान और साहिल को बीएनएस की धारा 103, व 3(5) में दोनों ने एकराय होकर हत्या को अंजाम दिया था।
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इसमें मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई गई। बीएनएस की धारा 238ए में हत्या के बाद शव को ड्रम में छिपाने का मुजरिम मानते हुए सात साल की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 50-50 हजार का जुर्माना भी लगाया है। शासकीय अधिवक्ता केके चौबे ने बताया कि साहिल और मुस्कान ने जघन्य अपराध किया था।
सौरभ की हत्या करने के बाद शव के चार टुकड़े कर दिए थे। तीन टुकड़े लेकर साहिल के घर आए और चार मार्च को नीले ड्रम में सीमेंट से जमा दिया था। सौरभ के दोस्त सौरभ और मां रेणू की मजबूत गवाही तथा मुस्कान की सौतेली मां कविता और पिता प्रमोद रस्तोगी ने भी अदालत को लिखित में दिया कि मुस्कान ने जघन्य अपराध किया है। उनका उस दिन ही रिश्ता टूट गया था। कोर्ट जो भी निर्णय करेगा। उन्हें मंजूर होगा।
सभी तथ्यों और गवाहों को मद्देनजर ही अदालत ने निर्णय सुनाया है। हालांकि मुस्कान और साहिल के अधिवक्ता रेखा जैन ने अदालत के सामने मुस्कान की दोनों बेटियों का वास्ता देकर सजा में नरमी बरतने की बात कही थी। हालांकि अदालत ने उनकी दलील को दरकिनार कर दिया।
