आस्था, सुरक्षा और हाईटेक तकनीक: यूपी में साल दर साल कितनी बदली कांवड़ यात्रा की तस्वीर?
उत्तर प्रदेश में इस वर्ष की कांवड़ यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, जिसमें हरिद्वार और ऋषिकेश से रिकॉर्ड 4.80 करोड़ शिवभक्तों ने गंगाजल उठाया।

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है
HighLights
रिकॉर्ड 4.80 करोड़ शिवभक्तों ने गंगाजल उठाया, यात्रा शांतिपूर्ण रही।
प्रशासन ने सुरक्षा, स्वास्थ्य और यातायात के व्यापक इंतजाम किए।
पहली बार बाइक एंबुलेंस और एआई तकनीक का उपयोग हुआ।
सचिन शर्मा, लखनऊ। श्रावण मास का महीना महादेव और उनके भक्तों के लिए बहुत खास माना जाता है। इस अवसर पर शिव भक्त कांवड़ यात्रा का आयोजन करते हैं। इस साल कावड़ यात्रा का आरंभ 30 जुलाई को हुआ, जो 11 अगस्त को समाप्त हो गई।
उत्तर प्रदेश में इस बार की कांवड़ यात्रा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। बड़ी संख्या में अलग-अलग शहरों से लोग गंगा जल लेकर भगवान शिव को अर्पित करने निकले। इस दौरान प्रशासन की व्यवस्था भी चाक-चौबंद रही। कांवड़ यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो इसका खास ख्याल रखा गया। बता दें कि, इस बार धर्मनगरी हरिद्वार और ऋषिकेश से गंगाजल उठाने वाले शिवभक्तों का आंकड़ा रिकॉर्ड 4.80 करोड़ को पार कर गया।

कांवड़ यात्रा के दौरान क्या रहे खास इंतजाम
इस बार की कांवड़ यात्रा के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए। सुरक्षा से लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं तक सभी व्यवस्थाएं बहुत बेहतर रहीं। शिव भक्तों के लिए विशेष कांवड़ एप लॉन्च किया गया, जिससे कांवड़ यात्रियों को रूट मैप, मंदिरों और चिकित्सा शिविरों की जानकारी एक पर मिल सके।
कांवड़ यात्रा की निगरानी के लिए सभी प्रमुख शहरों में पुलिस कंट्रोल रूम बनाए गए, सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए कांवड़ मार्गों की सख्त निगरानी की गई।
मेरठ और मुजफ्फरनगर समेत कई शहरों में यातायात डायवर्जन किया गया, ताकि कांवड़ यात्री और आम नागरिकों को किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। इसके लिए एनएच 58 समेत कई सड़कों पर रूट डायवर्ट किया गया और भारी वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया।

पहली बार तैनात की गई बाइक एंबुलेंस
भीड़भाड़ वाले इलाकों में किसी भी चिकित्सा सहायता के लिए बाइक एंबुलेंस तैनात की गईं। यह इंतजाम पहली बार किए गए। कांवड़ मार्गों पर जगह-जगह पर मेडिकल कैंप और विश्राम शिविर बनाए गए साथ ही खानपान का विशेष ध्यान रखा गया।
कांवड़ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाली सभी मांस और शराब की दुकानों को बंद रखा गया और पेयजल और स्वच्छता के पुख्ता इंतजाम किए गए।
कांवड़ यात्रा के दौरान यूपी परिवहन निगम ने भी खास इंतजाम किए। श्रावण मास के दौरान रोडवेज बसों की संख्या बढ़ा दी गई और बस स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के लिए खास इंतजाम किए गए।

साल दर साल कैसे बदली व्यवस्था
2017 में योगी सरकार के आने के बाद कांवड़ यात्रा पर विशेष फोकस किया गया। पहले के समय में प्रशासन के खराब इंतजामों के कारण हर साल कई घटनाएं देखने को मिलती थीं, जिससे कांवड़ यात्रियों के साथ आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब के समय में शासन के द्वारा कई व्यवस्थाओं को बेहतर किया गया है।
कांवड़ यात्रा के दौरान परंपरा के साथ आधुनिक तकनीक का भी पूरा इस्तेमाल किया गया। पहले जहां सभी इंतजाम पुलिस पर निर्भर होते थे वहीं अब पुलिस का साथ एआई और ड्रोन तकनीक ने भी निभाया है। कांवड़ यात्रा में यदि कोई असामाजिक तत्व उत्पात मचाने की कोशिश करता है, तो एआई कैमरे तुरंत उसकी पहचान कर लेते हैं। साथ ही पुलिस गश्त के साथ-साथ ड्रोन कैमरों से भी कांवड़ मार्गों की निगरानी की गई।
साल दर साल कांवड़ यात्रियों की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसी के मद्देनजर सरकार ने विशेष कांवड़ मार्ग बनाए ताकि आम नागरिकों और शिव भक्तों को कोई परेशानी न हो। इसके साथ ही बिजली के खंभों को पूरी तरह कवर किया गया ताकि करंट लगने का खतरा कम हो सके। पहले इस तरह की घटनाएं काफी देखने को मिलती थीं। कांवड़ यात्रियों पर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई।

मंदिरों में की गई विशेष व्यवस्था
पहले कांवड़ यात्रा के दौरान राज्य के प्रमुख शिव भक्तों की भीड़ बेकाबू हो जाती थी। जिससे भगदड़ और कई छुटपुट घटनाएं देखने को मिलती थीं। जिससे कई लोग घायल हो जाते थे। लेकिन अब मंदिरों में खास इंतजाम किए गए हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिरों में अधिक पुलस बल को तैनात किया गया। साथ ही जलाभिषेक के लिए बेहतर व्यवस्था की गई।
क्या रहे हैं कांवड़ यात्रा से जुड़े विवाद
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यात्रा मार्ग के ढाबों और दुकानों पर मालिकों के नाम लिखने के निर्देशों दिए गए थे, जिसे लेकर राजनीतिक और कानूनी घमासान ने तूल पकड़ा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दुकानदारों को नाम प्रदर्शित करने के आदेश पर रोक लगा दी थी।
पारंपरिक पैदल यात्रा के स्थान पर तेज आवाज वाले डीजे, डाक कांवड़ और भारी वाहनों का चलन बढ़ा। मामूली टक्कर या विवाद होने पर वाहनों में तोड़फोड़ और मारपीट की घटनाएं सामने आई, जिससे कानून-व्यवस्था पर सवाल उठे।
कांवड़ शिविरों और डीजे के कारण तय मानकों से अधिक शोर और यात्रा समाप्ति के बाद भारी मात्रा में कचरा छूटने का मुद्दा हमेशा से उठता रहा है।
अनोखी कांवड़ रहीं आकर्षण का केंद्र
इस बार कई अनोखी कांवड़ों ने सबका मन मोह लिया। अलग-अलग थीम की कांवड़ देखने को मिली, जहां एक तरफ 2.70 हजार और पचास हजार के नोट लगी अनूठी कांवड़ लेकर शिव भक्त निकले। जिनको यूपी पुलिस के द्वारा विशेष सुरक्षा दी गई।

भक्ति, आस्था और श्रद्धा के अद्भुत संगम के बीच दिल्ली-दून हाईवे पर 7.50 लाख रुपये कीमत की लग्जरी टार्जन द वंडर कार में विराजमान भगवान भोलेनाथ की अनोखी कांवड़ श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी।

दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल अमित उर्फ मिट्ठू मदेरिया एक अनोखी कांवड़ लेकर शिवभक्तों के साथ निकले हैं। इन्होंने भगवान शंकर की प्रतिमा के साथ कांवड़ को जिम का भव्य रूप दिया है। जिसमें डंबल, वेट और भगवान शिव की प्रतिमा रखी थी।

