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मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की तर्ज पर सहायता, निषाद-केवट समाज की बेटियों के विवाह पर 1 लाख देगी सरकार

Published: Tue, 08 Sep 2026 02:00 AM (IST)Updated: Tue, 08 Sep 2026 04:54 AM (IST)

उत्तर प्रदेश सरकार ने मत्स्य पालक कल्याण कोष का दायरा बढ़ाया है, जिसमें मछुआरा परिवारों की बेटियों को विवाह और ...और पढ़ें

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HighLights

  1. मत्स्य पालक कल्याण कोष का दायरा बढ़ाया गया।

  2. बेटियों के विवाह पर अब 1 लाख रुपये मिलेंगे।

  3. कक्षा 9-10 के छात्रों को शिक्षा सहायता मिलेगी।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश सरकार ने मत्स्य पालक कल्याण कोष के दायरे को बढ़ाते हुए मछुआरा परिवारों की बेटियों को वैवाहिक सहायता और कक्षा नौ-दस में पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षा सहायता देने की व्यवस्था की है। इसके तहत पात्र परिवारों की बेटी के विवाह पर एक लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। वहीं पूर्व दशम कक्षाओं में पढ़ने वाले पात्र विद्यार्थियों को अधिकतम 10 माह तक 150 रुपये प्रतिमाह और 750 रुपये वार्षिक तदर्थ अनुदान दिया जाएगा। शासन ने इसके लिए पूर्व में जारी मार्गदर्शिका में संशोधन कर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

पूर्व में वैवाहिक सहायता के तहत 51 हजार रुपये की राशि दी जाती थी। अब संशोधित दिशा-निर्देशों में इसे मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की सहायता राशि के बराबर एक लाख रुपये दिया गया है। एक जोड़े पर एक लाख रुपये की सहायता में 60 हजार रुपये कन्या के खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजे जाएंगे। 25 हजार रुपये वैवाहिक उपहार और 15 हजार रुपये कार्यक्रम आयोजन के लिए निर्धारित हैं। सहायता उन्हीं परिवारों को मिलेगी, जिन्हें मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना या किसी अन्य समानांतर वैवाहिक सहायता योजना का लाभ नहीं मिला है।

निराश्रित कन्या, विधवा की पुत्री और दिव्यांग अभिभावक अथवा स्वयं दिव्यांग कन्या को प्राथमिकता दी जाएगी। वैवाहिक सहायता के लिए आवेदक का प्रदेश का निवासी होना जरूरी है। वह केवट, मल्लाह, निषाद, बिंद, धीमर, कश्यप, बाथम, रैकवार, मांझी, गोंडिया, कहार, तुरैहा अथवा तुराहा समुदाय से संबंधित होना चाहिए या कम से कम एक वर्ष से मत्स्य पालन या मात्स्यिकी गतिविधियों से सक्रिय रूप से जुड़ा होकर उससे जीविकोपार्जन करता हो। कन्या की उम्र विवाह के दिन कम से कम 18 वर्ष और वर की 21 वर्ष होना अनिवार्य है।

वहीं अब तक मछुआरा परिवारों के कक्षा नौ और दस में पढ़ने वाले बच्चों को भी कल्याण कोष से पूर्वदशम छात्रवृत्ति मिलेगी। इसके लिए माता-पिता या अभिभावक की वार्षिक आय दो लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। छात्र को उत्तर प्रदेश में केंद्र या राज्य सरकार से संचालित अथवा मान्यता प्राप्त संस्थान में संस्थागत विद्यार्थी के रूप में अध्ययनरत होना जरूरी है। आय प्रमाणपत्र और विद्यालय से छात्रवृत्ति नहीं मिलने का प्रमाण देना होगा।

पहले सरकारी संस्थानों, फिर सहायता प्राप्त निजी और इसके बाद मान्यता प्राप्त निजी संस्थानों के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। कक्षा नौ पास कर कक्षा दस में पहुंचने वाले विद्यार्थियों को नए आवेदकों से पहले छात्रवृत्ति दी जाएगी। किसी दूसरी सरकारी योजना से छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थी इस योजना के पात्र नहीं होंगे।

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