राष्ट्रीय टीम को लेकर प्रदेश BJP का भी उलझ रहा समीकरण, यूपी के कई नाम नितिन नबीन की टीम में बना सकते हैं जगह
भाजपा उत्तर प्रदेश में संगठन और राष्ट्रीय टीम के गठन को लेकर दो माह से असमंजस में है, जिससे नियुक्तियों में देरी हो रही है। ...और पढ़ें

राष्ट्रीय टीम को लेकर प्रदेश भाजपा का भी उलझ रहा समीकरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। प्रदेश संगठन में बदलाव को लेकर दो माह से कसरत कर रही भाजपा के सामने राष्ट्रीय टीम का समीकरण भी उलझ रहा है। पार्टी के सामने दोनों संगठनों का निर्माण कर चुनावी डगर पर आगे बढ़ने का लक्ष्य है।
बंगाल चुनाव के बाद पार्टी राष्ट्रीय एवं प्रदेश इकाई दोनों पर फोकस करते हुए चुनावी समीकरण कसेगी। वहीं, कोर कमेटी बुलाने को लेकर चर्चा है। यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार, निगम आयोग एवं बोर्ड में रिक्त पदों को भरने को लेकर होमवर्क पूरा नहीं है।
चर्चा है कि संगठन से लेकर अन्य स्तरों पर असमंजस को दूर करने के लिए पार्टी कोर कमेटी में जाएगी। वहीं, दूसरे राज्यों में प्रभारी बनाकर भेजे गए एक राजपूत, एक ब्राहृमण व प्रदेश इकाई में पदाधिकारी एक ओबीसी चेहरे को राष्ट्रीय टीम में भेजने की बात उठी है।
पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि पहले यूपी में भाजपा के संगठन से जुड़े ज्यादातर विषय कोर कमेटी में रखकर हल किए जाते थे, जिसमें मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री संगठन, दोनों डिप्टी सीएम, कई पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ चेहरे आमंत्रित किए जाते हैं।
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कमेटी कई नामों पर विचार कर निर्णय देती है, जिसके बाद अध्यक्ष की ओर से सूची जारी करने की परंपरा है। पिछले दिनों प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े, राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष, गृहमंत्री अमित शाह एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिल चुके हैं, लेकिन संगठन एवं सरकार को लेकर कोई निर्णय सामने नहीं आया।
कहा जा रहा है कि पार्टी का अधूरा होमवर्क भी उलझन की वजह बना। अभी लखनऊ-दिल्ली के बीच कई बार की भागदौड़ बची है। वहीं, घोषणा में देरी होने से नामों को लेकर सिफारिशों का दबाव बढ़ता जा रहा है। 15 मई के आसपास पार्टी नई टीम घोषित करने का संकेत दे रही है। पार्टी बड़ी संख्या में महिलाओं को स्थान देकर विरोधी दलों को संदेश देगी।
21 अप्रैल को मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष पदयात्रा में देर तक साथ रहे, लेकिन किसी निर्णय पर कोई संकेत नहीं उभरा। 29 अप्रैल को हरदोई से मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री एवं दोनों डिप्टी सीएम लखनऊ वापस आए, लेकिन कोई औपचारिक मीटिंग नहीं हुई।
कहा जा रहा कि छह क्षेत्रीय अध्यक्षों एवं 45 सदस्यीय प्रदेश इकाई घोषित करने में दर्जनभर नामों पर खींचतान एवं सिफारिशों का दबाव इतना पड़ा कि निर्णय को फिलहाल टालना पड़ा है।
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