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उफान पर सई नदी: 12 फीट पहुंचा जलस्तर; तेरवा और गोड़वा समेत लखनऊ के इन गांवों पर मंडराया खतरा

Published: Thu, 03 Sep 2026 06:26 PM (GMT+05:30)

बंथरा में पौराणिक सई नदी का जलस्तर 12 फीट पहुंचने से सैकड़ों किसानों की धान, उड़द और तिल्ली की फसलें ...और पढ़ें

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HighLights

  1. सई नदी का जलस्तर 12 फीट पहुंचा, फसलें डूबीं।

  2. लखनऊ के कई गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराया।

  3. ग्रामीणों ने प्रशासन से सतर्कता बरतने की अपील की।

संवाद सूत्र, बंथरा। बंथरा के गांवों से निकली पौराणिक सई नदी उफान पर है। जलस्तर बढ़ने से आसपास के सैकड़ों किसानों की धान, उड़द और तिल्ली आदि की फसलें डूबा गई हैं। वहीं नदी का पानी लटऊवा, दाराब नगर बरकोता, तेरवा, गोड़वा , कल्लन खेड़ा, बेंती और बनी गांव की ओर काफी बढ़ा हुआ है। नदी किनारे मौजूद बनी गांव में बने प्रसाद हास्पिटल की इमारत के पास भी पानी काफी पहुंच चुका है।

ग्रामीणों को चिंता सता रही है कि अगर इस नदी का जलस्तर कुछ फिट और बढ़ा तो इससे दर्जनों गांव प्रभावित हो सकते हैं। बनी गांव निवासी वरिष्ठ नागरिक और समाजसेवी जननायक सिंह चौहान बताते हैं कि 1962 में सई नदी का पानी करीब 15 फिट ऊंचाई तक पहुंचा था जिसके कारण बनी, कल्लन खेड़ा, बेंती, सैदपुर और गोदौली सहित तमाम गांवों में बाढ़ आ गई थी।

बढ़ते जल स्तर से खतरा

इस बार अभी पानी करीब 12 फिट है , अगर जलस्तर चार से पांच फिट और बढ़ता है तो निश्चित तौर पर नदी का पानी कई गांवों तक पहुंच सकता है। 1962 की बाढ़ के बाद उनके गांव में दो बांध बनवाए गए थे जिससे नदी का पानी जल्दी से उनके यहां नहीं पहुंचना है लेकिन जिन गांवों में बांध नहीं है उनके लिए पानी का खतरा हो सकता है।

वहीं, सैदपुर पुरसी प्रधान मुरलीधर दीक्षित के मुताबिक उनके यहां नदी के पानी से राजेंद्र रावत, राजाराम रावत, सूर्यबली, ओमप्रकाश लोधी, मातादीन, हरिलाल और अनूप मिश्र सहित करीब चार दर्जन किसानों की धान की फसल डूब गई है।

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प्रधान मुरली कहते हैं कि इस बार पानी पिछले कई सालों बाद इतना बढ़ा है इसलिए लोग और भी डरे है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को भी सतर्क रहने की जरूरत है ताकि अगर बाढ़ जैसी स्थिति आए तो उससे निपटा जा सके।