लखनऊ : पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने वाले विजय बहादुर को उम्रकैद, ऑपरेशन कन्विक्शन से मिला न्याय
लखनऊ में पारिवारिक विवाद में युवक को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने के मामले में अदालत ने आरोपित विजय बहादुर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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जागरण संवाददाता, लखनऊ। पारिवारिक विवाद और रंजिश में युवक के साथ मारपीट के बाद पेट्रोल डालकर आग लगाने के मामले में अदालत ने आरोपित विजय बहादुर को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
विशेष न्यायाधीश आयुर्वेद घोटाला प्रकरण/सीबीआइ, लखनऊ की अदालत ने आरोपित पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर उसे छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
यह फैसला 14 अगस्त को आपरेशन कन्विक्शन के तहत लखनऊ पुलिस और अभियोजन विभाग की प्रभावी पैरवी के बाद आया। मामला वर्ष 2021 का है। पुलिस के मुताबिक नन्हू प्रसाद निवासी दुल्हापुर हुसैनाबाद, नगराम ने मोहनलालगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी आग
वादी के मुताबिक उसके बेटे संगम कुमार का विवाह वर्ष 2013 में शीला से हुआ था। संगम पत्नी और बेटे के साथ अपने ससुराल में रहकर जीवन यापन करता था। आरोप था कि पारिवारिक विवाद और रंजिश के चलते उसके साथ मारपीट और प्रताड़ना की जाती थी। 24 अगस्त 2021 को भी संगम के साथ मारपीट की गई। आरोप है कि इसके बाद महादीन, रामरुचि उर्फ रामू, महादीन के दामाद और सुमन ने एकराय होकर संगम के ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगा दी।
मामले में उसकी पत्नी शीला और साली किरन की भी संलिप्तता अथवा साजिश का आरोप लगाया गया था। गंभीर रूप से झुलसे संगम को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां 27 अगस्त 2021 को उसकी मृत्यु हो गई। विवेचना के बाद पुलिस ने मामले में आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की। मुकदमे में विजय बहादुर को मृतक के ससुर महादीन का दामाद बताया गया है।
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पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आपरेशन कन्विक्शन का उद्देश्य गंभीर अपराधों में आरोपितों को अधिकतम सजा दिलाने के लिए विवेचना से लेकर न्यायालय में पैरवी तक प्रभावी समन्वय स्थापित करना है।
चार साल बाद आया फैसला: इस मामले में मोहनलालगंज थाने में मुकदमा अपराध संख्या 450/22 धारा 302 भादवि के तहत दर्ज हुआ था। पुलिस के पैरोकार कांस्टेबल प्रदीप आनंद और प्रभारी निरीक्षक राम बाबू सिंह की पैरवी से अभियोजन पक्ष ने अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किए। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विजय बहादुर को दोषसिद्ध करते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

