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KGMU में यूपी की पहली फॉरेंसिक लैब तैयार, अब DNA टेस्ट और आपदा में मारे गए लोगों की आसानी से हो सकेगी पहचान

Published: Fri, 23 Oct 2026 11:25 PM (IST)

लखनऊ के किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में उत्तर प्रदेश की पहली डीएनए फिंगरप्रिंटिंग प्रयोगशाला का उद्घाटन हुआ है। यह ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. केजीएमयू में यूपी की पहली डीएनए लैब का उद्घाटन।

  2. अज्ञात शवों, आपदा पीड़ितों की पहचान में मिलेगी मदद।

  3. फॉरेंसिक जांच, अनुसंधान और आधुनिक इलाज को मिलेगा बढ़ावा।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। अज्ञात शवों की पहचान हो या आपदा में मारे गए लोगों का पता लगाना, डीएनए की वैज्ञानिक जांच अब इन मामलों में अहम भूमिका निभाएगी। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में शुक्रवार को प्रदेश की पहली डीएनए फिंगरप्रिंटिंग प्रयोगशाला का शुभारंभ किया गया।

फारेंसिक मेडिसिन एवं टाक्सिकोलाजी विभाग में स्थापित इस प्रयोगशाला से फारेंसिक जांच, अनुसंधान और आधुनिक इलाज को बढ़ावा मिलेगा।कुलपति प्रो. डा. सोनिया नित्यानंद ने प्रयोगशाला का उद्घाटन किया।

प्रो. नित्यानंद ने डीएनए आधारित तकनीकों के विस्तार पर जोर देते हुए बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद काइमेरिज्म विश्लेषण जैसे उपयोग विकसित करने को कहा। यह एक प्रकार का विशेष डीएनए टेस्ट है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से बोनमैरो प्रत्यारोपण या स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के बाद मरीज के शरीर में दाता की कोशिकाओं की स्थिति को ट्रैक करने के लिए किया जाता है।

प्रयोगशाला में जांच के साथ नवाचार की भी योजना

फारेंसिक मेडिसिन एवं टाक्सिकोलाजी विभागाध्यक्ष प्रो. डा. अनूप कुमार वर्मा ने बताया कि डीएनए प्रोफाइलिंग आधुनिक फारेंसिक जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे अज्ञात शवों की पहचान, आपदा पीड़ितों की शिनाख्त, पितृत्व निर्धारण तथा अस्पतालों में नवजात शिशुओं की अदला-बदली से जुड़े मामलों की जांच में मदद मिलेगी। एसोसिएट प्रोफेसर डा. अंशु प्रिया ने बताया कि प्रयोगशाला में जांच के साथ अनुसंधान एवं नवाचार की भी योजना है।

KGMU

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भविष्य में कैंसर में माइक्रोसैटेलाइट अस्थिरता की जांच, कुछ न्यूरोलाजिकल विकारों से जुड़े रिपीट-एक्सपेंशन परीक्षण और सेल-लाइन आथेंटिकेशन जैसे प्रयोग की संभावना बढ़ेगी। दो दिवसीय कार्यशाला में कई राज्यों के मेडिकल कालेजों एवं संस्थानों से आए शोधार्थियों, पीजी रेजिडेंट, शिक्षकों और फारेंसिक विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस मौके पर केजीएमयू के नर्सिंग डीन एवं प्रवक्ता प्रो. केके सिंह समेत कई डाक्टर मौजूद रहे।