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    800 पन्नों की रिपोर्ट और 7 घंटे की रिकॉर्डिंग, IIT खड़गपुर की जांच में खुलेगा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का राज

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 07:13 AM (IST)

    आईआईटी खड़गपुर की टीम ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर 23 बार सड़क धंसने और दरकने के कारणों की जांच पूरी की है। आठ सौ पन्नों की रिपोर्ट और सात घंटे की रि ...और पढ़ें

    800 पन्नों के डॉक्यूमेंट खोलेंगे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की कमियां।

    800 पन्नों के डॉक्यूमेंट खोलेंगे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की कमियां।

    HighLights

    1. आईआईटी खड़गपुर ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की जांच पूरी की।

    2. 23 बार सड़क धंसने के कारणों का पता लगाया जाएगा।

    3. 800 पन्नों की रिपोर्ट 12 दिनों में एनएचएआई को मिलेगी।

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के ग्रीन फील्ड में क्या कमियां थी, जिसके कारण 23 बार सड़के धंसी और दरकी। इसका खुलासा आठ सौ पन्नों के दस्तावेजों से होगा। 12 दिन के भीतर आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर केएस रेड्डी अपनी रिपोर्ट भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) मुख्यालय को सौंप देंगे। जांच के बाद टीम के सदस्य वापस लौट गए हैं।

    टीम का नेतृत्व कर रहे रेड्डी ने एक्सप्रेसवे पर जांच के दौरान हर गतिविधियों की वीडियो ग्राफी कराई है और मौके पर कार्यदायी संस्था पीएनसी, स्वतंत्र एजेंसी व एनएचएआई अफसरों से सवाल जवाब किए, उसकी सात घंटे की रिकॉर्डिंग भी कराई। टीम ने साइड से तीस नमूने लिए हैं। इनमें कुछ नमूने उन चार प्रमुख स्थानों से लिए गए हैं, जहां सड़क ज्यादा धंसी व दरकी थी।

    इसके अलावा ग्रीन फील्ड के सामान्य स्थान से भी यही नमूने लिए गए हैं। टीम देखेगी कि दोनों नमूनों में क्या अंतर है और जांच में क्या रिपोर्ट आ रही है? उसी के आधार पर आगे के निष्कर्ष निकल सकेंगे। टीम ने ग्रीन फील्ड से कई सतह की मिट्टी ली है। इनमें सूखी मिट्टी, गिली और ढाई से तीन मीटर नीचे की मिट्टी के नमूने लिए हैं। टीम में दिल्ली से आए एनएचएआई सदस्य आलोक दीपांकर भी मौजूद रहे।

    उन्होंने भी कार्यदायी संस्था के सदस्यों से कई चीजें पूछी। इस दौरान आईआईटी टीम ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के पूरी डिजाइन रिपोर्ट मांगी, जिसे एनएचएआई लखनऊ की टीम ने सौंप दिया है।

    पीएनसी द्वारा डिजाइन में कोई परिवर्तन तो नहीं किए गए, इसका भी अध्ययन किया गया। उन्होंने जांच में पाया कि जहां सड़क धंस व दरक रही थी, वह सड़क का लेवल ड्रेनेज सिस्टम यानी नालियों से ऊपर था। इनसे बरसात का पानी ही नहीं निकल पा रहा था। यह स्थान उन्नाव के कोरारी के आसपास का था, जिसकी दूरी पांच सौ मीटर के इर्दगिर्द थी। यह देखकर आईआईटी प्रोफेसर ने तुरंत इसे तोड़ने के निर्देश दिए।

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    नालियां टूटने के बाद सड़क पर पानी डालकर देखा गया तो पानी टूटी हुई नालियों की तरफ जाने लगा, कई स्थान पर पानी बीच में रुक रहा था। यहां ढाल सही नहीं पायी गई। वहां पर ढाल ठीक करने के साथ ही कानपुर से लखनऊ आते वक्त ग्रीन फील्ड की तोड़ी गई नालियों का लेवल सही करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद एनएचएआई सुझाव पर काम करेगा और फिर आईआईटी खडगपुर से सेफ्टी ऑडिट कराएगा।

    उधर शुक्रवार देर रात से ही डायवर्जन हटाने का दावा प्राधिकरण के अफसरों ने किया है। अफसरों का कहना है कि अभी टोल नहीं वसूला जाएगा, यह कब से लिया जाएगा, इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।

    टीम ने मौके पर जांच कर ली है। दस से 12 दिन में रिपोर्ट आने की संभावना है। कोई डायवर्जन नहीं है। न ही पिछले दो दिन से कोई समस्या एक्सप्रेसवे के ग्रीन फील्ड पर आई है। कह सकते हैं कि सबकुछ ठीक है। -गौतम विशाल, क्षेत्रीय अधिकारी, लखनऊ, एनएचएआई।

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