नेताओं से था टकराव, जनता से जुड़ाव... अपनी बेबाक कार्यशैली से IAS दिव्या मित्तल ने बनाई अलग पहचान
आईएएस दिव्या मित्तल ने अपनी बेबाक कार्यशैली और जनता से सीधे जुड़ाव के लिए पहचान बनाई। राजनीतिक टकरावों और दबाव के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

आईएएस दिव्या मित्तल
HighLights
आईएएस दिव्या मित्तल की बेबाक कार्यशैली और जनता से सीधा जुड़ाव।
मीरजापुर और देवरिया में जनप्रतिनिधियों से हुए सियासी टकराव।
राजनीतिक दबाव के बाद पद से इस्तीफा, अखिलेश यादव की टिप्पणी।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। सत्ता के गलियारों में जहां ज्यादातर अफसर सियासी टकराव से बचने की कोशिश करते हैं, वहींने कई मौकों पर प्रशासनिक फैसलों और जनप्रतिनिधियों के दबाव के बीच अपनी अलग लकीर खींची। कभी सुदूर गांव में पहुंचकर ग्रामीणों की समस्या सुनना और वर्षों से पानी को तरस रहे गांव तक पाइपलाइन पहुंचाना, तो कभी बैठक में खुले तौर पर ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए दबाव न बनाने की नसीहत देना। उनकी यही बेबाक कार्यशैली उन्हें सुर्खियों में रखती रही।
वर्ष 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल की पहचान एक ऐसी अफसर के रूप में बनी, जिसने फील्ड पोस्टिंग में जनता से सीधे संवाद को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाया। हालांकि, यही बेबाकी कई बार उन्हें राजनीतिक विवादों के केंद्र में भी ले आई। मीरजापुर में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल से कथित मतभेद और बाद में देवरिया में भाजपा के जनप्रतिनिधियों के साथ ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर विवाद उनके प्रशासनिक सफर के सबसे चर्चित अध्याय रहे।
सितंबर 2022 में मीरजापुर की डीएम बनीं दिव्या मित्तल ने जिले के ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में जन-चौपाल के जरिए सीधे लोगों से संवाद शुरू किया। हलिया क्षेत्र के लहुरियादह गांव में पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने की पहल ने उन्हें खास पहचान दिलाई।
दशकों से पेयजल संकट झेल रहे इस गांव में पानी पहुंचने के बाद ग्रामीणों के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ी। ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ और ग्राम चौपाल जैसे अभियानों के जरिए भी उन्होंने गांवों में पहुंचकर समस्याएं सुनने और मौके पर ही अधिकारियों को समाधान के निर्देश देने पर जोर दिया, लेकिन मीरजापुर में उनकी लोकप्रियता के साथ ही राजनीतिक खेमों से कथित टकराव की खबरें भी सामने आने लगीं।
पेयजल परियोजना के कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किए जाने को लेकर तत्कालीन मीरजापुर सांसद और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के खेमे की नाराजगी की खबरें सामने आईं। हालांकि, तबादले की खबर के बाद मीरजापुर में उनकी विदाई का दृश्य भी खूब चर्चा में रहा। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने उन्हें फूलों की बारिश के साथ विदाई दी। इसके बाद उन्हें प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया।
जुलाई 2024 में उन्हें देवरिया का जिलाधिकारी बनाया गया। यहां भी उनकी बेबाक कार्यशैली ज्यादा दिनों तक राजनीतिक चर्चा से दूर नहीं रही। जुलाई 2025 में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर सवाल उठे तो दिव्या मित्तल ने जनप्रतिनिधियों से प्रशासन पर अनुचित दबाव नहीं बनाने की बात कही।
इसके बाद देवरिया से उनका तबादला कर दिया गया और मई 2026 में उन्हें राजस्व विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी दी गई। दैनिक जागरण से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह काफी समय से इस्तीफा देने के बारे में सोच रही थीं और अपने फैसले से संतुष्ट हैं। उन्होंने संकेत दिया कि उनकी कुछ और योजना है, जिसका खुलासा वह बाद में करेंगी।
ईमानदार अफसरों पर अनैतिक काम का दबाव : अखिलेश
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि प्रदेश में ईमानदार अधिकारियों पर अनैतिक और गैरकानूनी काम करने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें इस्तीफा देने तक के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
उन्होंने रविवार को एक्स पर आरोप लगाया कि अधिकारियों पर कमीशन के जरिए भ्रष्टाचार, भाजपा कार्यकर्ताओं के पक्ष में टेंडर प्रभावित करने और तबादला-पोस्टिंग को कारोबार बनाने का दबाव है।
उन्होंने विपक्षी नेताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज कराने, हिरासत में मौत के मामलों को दबाने और किसानों, मजदूरों, महिलाओं व युवाओं से जुड़े मामलों में भी दबाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईमानदार अधिकारियों के बिना शासन और प्रशासन नहीं चल सकता।
